विलय के बाद छोटे बैंकों की तुलना में बड़े बैंकों को होगा अधिक फायदा


service activities falls to lowest in September says PMI survey

 

वित्त मंत्रालय के प्रेजेंटेशन से उपलब्ध डेटा का विश्लेषण यह दिखाता है कि पूंजी पर्याप्तता के मामले में बड़े बैंकों को छोटे बैंकों की तुलना में अधिक लाभ पहुंचेगा. विगत सालों की तुलना में यह काफी बड़ा बदलाव है. इससे पहले सरकार साल दर साल इन बैंकों को पूंजी उपलब्ध करवाती थी.

सार्वजनिक क्षेत्र के छोटे बैंकों का बड़े बैंकों के साथ विलय करने के बाद सरकार बैंकों के लिए पूंजी की मांग को तर्कसंगत साबित करने में कामयाब रही है. शुक्रवार 30 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय का एलान किया था.

उदाहरण के लिए केनरा बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 11.9 फीसदी का था और सिंडिकेट बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 14.23 फीसदी था. विलय के बाद यह 12.63 फीसदी हो जाएगा. इंडियन बैंक के अलावा सभी बड़े बैंकों की तुलना में छोटे बैंकों का पूंजी पर्याप्तता अनुपात निचले स्तर पर है.

विलय की घोषणा के अलावा सरकार ने कहा है कि वह बैंकों को पूंजी देगी. इसके तहत 16,000 करोड़ पंजाब नेशनल बैंक को मिलेंगे, 11,700 करोड़ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को मिलेंगे, 7,000 करोड़ बैंक ऑफ बरोदा को मिलेंगे, 6,500 करोड़ केनरा बैंक को मिलेंगे, 2,500 करोड़ इंडियन बैंक को मिलेंगे, 3,800 करोड़ इंडियन ओवरसीज बैंक को मिलेंगे, 3,300 करोड़ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को मिलेंगे, 2,200 करोड़ यूको बैंक को मिलेंगे, 1,600 करोड़ यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को मिलेंगे और 750 करोड़ रुपये पंजाब एंड सिंध बैंक को मिलेंगे.

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “यह पूरी तरह से अनुमानित संख्याएं हैं. हम केवल जानकारी देने के लिए बता रहे हैं. हम जरूरत के मुताबिक इसे घटाए-बढ़ाएंगे. अभी हम सिर्फ एक व्यापक संकेत दे रहे हैं.”

वित्त वर्ष 2019 में सरकार ने एक ट्रिलियन रुपये सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को दिए हैं. इस साल फरवरी में सरकार ने 48,239 करोड़ रुपये दिए थे. इसके बाद छह बैंको को भारतीय रिजर्व बैंक के प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (पीसीए) ढांचे से निकले में मदद मिली थी. आरबीआई पीसीए ढांचे का इस्तेमाल बैड लोन और पूंजी पर्याप्तता में कुछ नियामक का उल्लंघन करने वाले बैंकों पर लगाम लगाने के लिए करती है.

वित्त वर्ष 2014 के बाद से सरकार और भारतीय जीवन बीमा कॉर्पोरेशन ने सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंको को 3 ट्रिलियन रुपये दिए हैं.

एडलवाइस समूह के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राशेष शाह ने कहा, “बैंकिंग क्षेत्र में समेकन पूंजी के बेहतर उपयोग से अधिक ऋण वितरण, केंद्रित ग्राहक सेवा और वैश्विक विस्तार के अवसरों के माध्यम से उच्च क्षमता का निर्माण करेगा. मौलिक रूप से हमारे पास एक साफ, संरचनात्मक रूप से मजबूत और लाभदायक बैंकिंग प्रणाली होगी.”

रेटिंग एजेंसी आईक्रा लिमिटेड के उपाध्यक्ष और सेक्टर प्रमुख अनिल गुप्ता ने समझाया कि पीसीए ढांचे के अंतर्गत पांच में से सिर्फ तीन बैंकों का वित्त पोषण करने का एलान किया गया है. इसमें इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक शामिल हैं.

उन्होंने कहा, “हमारी समझ से एलान की गई पूंजी इन बैंकों को तत्काल भविष्य में पीसीए से बाहर निकलने के लिए काफी होने की संभावना नहीं है. विलय होने से यूनाईटेड बैंक अस्तित्व में नहीं रहेगा और आईडीबीआई बैंक के लिए परिणाम उसके पूंजी जुटाने पर निर्भर करेगा.”


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