कंपनी अधिनियम में संशोधन कर CSR को सरकार ने बनाया जटिल
कंपनी अधिनियम, 2013 में सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन को संसद की मंजूरी मिल गई है. निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी-सीएसआर), कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत आता है. यह कानून 1 अप्रैल 2014 में लागू किया गया था.
इस कानून के तहत जिन कंपनियों की कुल संपत्ती 500 करोड़ रुपये है या कंपनी का राजस्व 1,000 करोड़ रुपये है या कंपनी शुरू होने के बाद पहले वित्तीय वर्ष में शुद्ध लाभ 5 करोड़ रुपये है, उन्हें पिछले तीन साल के औसत कुल लाभ का 2 फीसदी सामाजिक विकास के लिए खर्च करना होगा.
इसमें शिक्षा, स्वच्छता, भूखमरी खत्म करना, गरीबी और कुपोषण, विरासतों का संरक्षण, कला और संस्कृति और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसे कि सिलाई के लिए प्रशिक्षण केंद्र या प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करना शामिल है.
अभी तक ऐसा हो रहा था कि अगर कोई कंपनी एक साल के अंदर सीएसआर की राशि पूरी तरह सामाजिक कार्यों पर खर्च नहीं कर पाती थी, तो बची हुई राशि अगले साल की राशि के साथ मिलाकर सामाजिक कार्यों पर खर्च कर सकती थी.
लेकिन अब नए कानून के मुताबिक कंपनियों को बची हुई राशि को वित्तीय वर्ष समाप्त होने के तीस दिन के भीतर एक नए एस्क्रो खाते (Escrow Account) में जमा करना होगी. इस राशि को ट्रांस्फर करने की तारीख से लेकर तीन साल के भीतर खर्च करना होगा, अगर ऐसा नहीं किया गया तो यह राशि किसी कोष में डाल दी जाएगी, और वह कोष प्रधानमंत्री राहत कोष भी हो सकता है.
इसके अलावा सरकार कंपनी अधिनियम में एक विशेष दंड का प्रावधान भी शामिल करेगी. यह उन कंपनियों पर लागू होगा जो सीएसआर का अनुपालन नहीं करेंगी.
कंपनी संशोधन विधेयक,2019 के तहत वे कंपनियां जो सीएसआर मानदंड का उल्लंघन करेंगी उन कंपनियों पर 50,000 रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है. इसके अलावा संबंधित अधिकारी को तीन साल जेल की सजा भी हो सकती है.
कंपनियों की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक देश में सबसे ज्यादा सीएसआर पर खर्च करने वाली कंपनियों में शीर्ष पर रिलायंस इंडस्ट्रीज है. वित्तीय वर्ष 2019 में रिलायंस ने शुद्ध लाभ का 2.1 फीसदी के साथ 904 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके अलावा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने 2 फीसदी शुद्ध लाभ के साथ 503.4 करोड़ रुपये खर्च किए. एचजीएफसी ने भी 2 फीसदी कुल लाभ पर 490.6 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने वित्त वर्ष 2019 में 1.6 फीसदी शुद्ध लाभ के साथ 434 करोड़ रुपये खर्च किए. इन्फोसिस, आईटीसी और एनटीपीसी ने वित्त वर्ष 2019 में 2, 2.46 और 2.4 फीसदी के कुल लाभ के साथ 342.04, 306.95, 285.56 करोड़ रुपये खर्च किए. ओएनजीसी (वित्तीय वर्ष – 2018 ) ने 2.1 फीसदी के कुल लाभ के साथ 503.4 करोड़ सीएसआर पर खर्च किए हैं.
सरकार के इस कदम की आलोचना हो रही है. इसे निजी क्षेत्र को दंडित करने के एक अन्य कदम की तरह देखा जा रहा है. इससे पहले बजट में सरकार ने अमीरों के लिए कर भुगतान बढ़ा दिया है. यह माना जा रहा है कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों को निजी क्षेत्रों पर थोप रही है. इस नए संशोधन में भी सरकार कंपनियों के कर को बढ़ा रही है, क्योंकि अगर कंपनियां कुल सीएसआर राशि नहीं खर्च करेंगी तो उन्हें दंडित किया जाएगा. इस कदम से कंपनियों का खर्च भी बढ़ेगा.
सूचीबद्ध कंपनियों को मानदंड का पालन सुनिश्चित करते हुए सीएसआर संबंधित सभी गतिविधियां ,खर्च की गई राशि और काम-काज के तरीकों को बताना होगा. उन्हें एक सीएसआर टीम का गठन करना होगा जो सीएसआर समिति को एक नियमित रिपोर्ट और अपडेट प्रदान करेगी. इसके अलावा समिति को हर छह महीने में सभी गतिविधियों संबंधित रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें आगे के टार्गेट के बारे में भी बताना होगा साथ ही कुछ रह गया हो तो उस बारे में भी बताना होगा. इसके बाद इन सबकी रिपोर्ट बनाकर कॉर्पोरेट मामले के मंत्रालय में जमा करना होगा.