ऑटो उद्योग में सुस्ती के चलते करीब 10 लाख लोगों की नौकरी खतरे में


13 percent decrease in vehicle production in April-July

 

ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी कि एसीएमए ने कहा है कि इस उद्योग क्षेत्र में कार्यरत करीब 10 लाख लोगों की नौकरियां खतरे में हैं. देश का ऑटोमोबाइल उद्योग इस समय गंभीर सुस्ती के दौर से गुजर रहा है.

इससे जुड़े हुए लोगों का मानना है कि इस समय सरकार को इसे बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे. एसीएमए चाहता है कि सरकार जीएसटी को कम करने जैसे कदम उठाकर मांग को गति देने का प्रयास करे.

ऑटो कंपोनेंट उद्योग ने करीब 50 लाख लोगों को रोजगार दे रखा है. इस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और संगठनों की मांग है कि सरकार पूरे उद्योग के लिए 18 फीसदी की एक समान जीएसटी लागू करे. बीते 10 महीने से लगातार बिक्री में गिरावट का सामना कर रहे इस उद्योग को फिर से गति देने के लिए ये कदम जरूरी बताए जा रहे हैं.

एसीएमए के अध्यक्ष राम वेंकटरमानी का मानना है कि ये स्थिति अभूतपूर्व है. वो कहते हैं कि बीते कुछ महीनों से हर तरह के वाहनों की बिक्री में कमी देखी गई है. अब इसका सीधा प्रभाव ऑटो कंपोनेंट उद्योग पर भी पड़ रहा है.

उन्होंने कहा, “इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि ऑटो कंपोनेंट उद्योग सीधे तौर पर वाहन उद्योग के ऊपर निर्भर करता है. इस समय वाहन उत्पादन में हुई 15 से 20 फीसदी की कमी की वजह से इस तरह की गंभीर स्थिति पैदा हुई है.”

उन्होंने कहा, “यदि यही दौर जारी रहा तो इस उद्योग में कार्यरत करीब 10 लाख लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा.”

जब वेंकटरमानी से पूछा गया कि क्या इसकी वजह से नौकरियों में छंटनी भी हो सकती है. तो उन्होंने बताया, “इस क्षेत्र में करीब 70 फीसदी कर्मचारी संविदा पर काम करते हैं. इसलिए जब मांग में कमी होगी, कर्मचारियों की छंटनी होगी.”

उनका कहना है कि ये उद्योग तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की राह देख रहा है. उन्होंने कहा कि हम सरकार से जोरदार सिफारिश करते हैं कि पूरे ऑटो और ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र में 18 फीसदी की एक समान जीएसटी दरें लागू की जाए.

एसीएमए के महानिदेशक विन्नी मेहता जोर देकर कहते हैं कि सरकार की इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को लेकर बनाई गई नीति के लिए एक स्थिर रोड मैप तैयार करने की जरूरत है.

सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने प्रस्ताव रखा है कि 2023 तक सभी तिपहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों से और दोपहिया वाहनों को 2025 तक इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रतिस्थापित कर दिया जाए. ऑटो उद्योग में इसको लेकर भी निराशा का माहौल बताया जा रहा है.


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