विनिर्माण क्षेत्र में दिवालियापन सबसे अधिक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर देने के बाद भी 2016 के बाद से विनिर्माण क्षेत्र सबसे ज्यादा दिवालियापन का शिकार हुआ है. यह इस क्षेत्र में कमजोरी का सूचक है.
इंडियन बैंगक्रप्सी कोड के प्रकाश में आने के बाद से इस क्षेत्र से अकेले 42 प्रतिशत कॉरपोरेट दिवालियापन स्वीकृति प्रस्ताव फाइल किए गए हैं. क्षेत्र से अब तक 899 ऐसे प्रस्ताव फाइल किए जा चुके हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि नोटबंदी और उसके बाद खराब तरीके से लागू जीएसटी की वजह से ऐसा हुआ है. केयर रेटिंग के एक विश्लेशषक ने कहा, “मांग में आई हालिया कमी से भी क्षेत्र में दिवालियापन बढ़ा है. वहीं बाजार में तरलता के संकट की वजह से कंपनियों को फंडिग भी नहीं मिल पा रही है.”
इंसोल्वेंसी एंड बैंगक्रप्सी बोर्ड के डेटा के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र में कपड़ा, चमड़ा और इसी तरह के मिलते जुलते उद्योगों से सबसे ज्यादा 151 दिवालियापन स्वीकृति प्रस्ताव फाइल किए गए हैं. ये वही क्षेत्र हैं, जिन्होंने जीएसटी लागू होने के बाद सबसे ज्यादा मार सही है.
विनिर्माण क्षेत्र के बाद रियल स्टेट क्षेत्र से सबसे ज्यादा दिवालियापन स्वीकृति प्रस्ताव फाइल किए गए हैं. इनकी संख्या 421 है. ऐसे कुल 2,162 मामलों में अब तक या तो केवल आठ फीसदी को सुलझाया अथवा बंद किया जा सका है.
वहीं इंडियन बैंगक्रप्सी कोड के आने के बाद से भारत में रिकवरी रेट में सुधार हुआ है. कोड के आने से पहले यह 26 प्रतिशत था, अभी यह 43 प्रतिशत है. हालांकि, वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में यह 14 प्रतिशत तक नीचे गिर गया.