ओलंपिक चैंपियन सेमेन्या ‘टेस्टोस्टेरोन की ऐतिहासिक लड़ाई’ हारीं
ट्विटर
मध्यम दूरी की दक्षिण अफ्रीकी धाविका कैस्टर सेमेन्या को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए अमान्य घोषित कर दिया गया है. सेमेन्या 800 मीटर दौड़ में दो बार ओलंपिक चैंपियन रह चुकी हैं. उन्हें उस नियम के तहत अमान्य घोषित किया गया है जिसमें महिला एथलीटों को अपने टेस्टोस्टेरोन स्तर पर नियंत्रण रखना होता है.
हालांकि जजों ने इस भेदभाव करने वाले नियम पर चिंता भी व्यक्त की है. सेमेन्या एथलेटिक्स महासंघों के अंतरराष्ट्रीय संघ (आईएएएफ) के खिलाफ लड़ रही थीं.
वे उस नियम का विरोध कर रहीं थी, जिसके अंतर्गत ‘हाइपरएंड्रोजेनिक’ यानी कि यौन विकास में भिन्नता वाले एथलीटों को अगर महिला के तौर पर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना है तो उन्हें अपने टेस्टोस्टेरोन स्तर को कम रखना होता है.
इस फैसले के बाद सेमेन्या को दवाओं के बल पर अपने टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करना होगा. ये दवाएं अप्राकृतिक और हानिकारक बताई जाती हैं.
खेल पंचाट (सीएएस) में तीन जजों के पैनल ने कहा कि उसे इस तरह के नियमों के भविष्य में व्यावहारिक प्रयोग को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं हैं.
सीएएस के फैसले का विरोध करते हुए सेमेन्या ने कहा कि उन्हें लगता है, “आईएएएफ विशेष रूप से उन्हें हमेशा निशाना बनाता रहा है.”
उधर दक्षिण अफ्रीकी खेल संघ ने इसको लेकर विरोध जताया है. बोर्ड की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, “हम बुरी तरह से निराश और स्तब्ध हैं.”
हालांकि सेमेन्या आगामी शुक्रवार को दोहा में होने वाली डायमंड लीग में हिस्सा ले सकती हैं. उनके पास अगले 30 दिन तक स्विटजरलैंड के ट्रिब्यूनल कोर्ट में अपील करने का अधिकार भी है.
इससे पहले इस मामले में सुनवाई के दौरान आईएएएफ ने जोर दिया था कि ये नियम खेल के लिए जरूरी हैं. ये नियम सुनिश्चित करते हैं कि सभी महिला एथलीट सफलता हासिल कर सकें.
आईएएएफ का मानना है कि अगर महिला एथलीट में टेस्टोस्टेरोन का स्तर पुरूषों की तरह होगा तो उनकी हड्डियों और मांसपेशियों के आकार में तथा हीमोग्लोबिन और मजबूती में उसी तरह की बढ़ोतरी होगी जैसी पुरूषों में युवावस्था में होती है.
पंचाट के इस फैसले के बाद पूरी दुनिया में विवाद खड़ा हो गया है. कुछ लोग जमकर इसका विरोध कर रहे हैं. विरोधियों का कहना है कि टेस्टोस्टेरोन लिंग निर्धारण करने का मनमाना और अनुचित तरीका है.
कानून की प्रोफेसर स्टीवी कॉरनेलिस कहती हैं कि महिला एथलीटों को हार्मोन का स्तर कम करने के लिए दवाई लेने पर मजबूर करना अनैतिक है. उन्होंने कहा, “दरअसल आप एक स्वस्थ व्यक्ति की बात कर रहे हैं और उसी व्यक्ति को आप बीमार बना रहे हैं.”