क्रिसिल ने 2019-20 की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.9 प्रतिशत किया
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर के अपने अनुमान को 0.20 प्रतिशत घटाकर को 6.9 प्रतिशत कर दिया. रेटिंग एजेंसी ने सुस्त वैश्विक वृद्धि, घट रहे उपभोग, कमजोर निजी निवेश और औसत से नीचे के मानसून के देखते हुए यह संशोधन किया है.
हलांकि, एजेंसी ने ये भी कहा है कि वर्तमान आर्थिक मंदी उतनी बुरी नहीं है, जितनी 2012-13 और 2013-14 में थी. एजेंसी ने कहा कि यह आर्थिक मंदी 2009 की तरह है, जब अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से पटरी पर लौट आई थी.
क्रिसिल ने रिपोर्ट में कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में सुस्ती रहेगी जबकि अनुकूल मौद्रिक स्थितियां और खपत में वृद्धि से दूसरी छमाही को समर्थन मिलने की उम्मीद है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था देश- दुनिया में होने वाले घटनाक्रमों से प्रभावित होगी. ऐसे में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि पहले के अनुमान से 0.20 प्रतिशत घटकर 6.9 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है.
रिपोर्ट में गौर किया गया है कि वित्त वर्ष 2016- 17 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 8.2 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि हासिल की थी. इसके बाद नई नीतिगत पहलों, सुधारों को बढ़ाने और व्यापार विवाद सहित वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता का असर रहा. पिछले साल के आखिर में शुरू हुआ आवास वित्त कंपनियों का संकट और आय कम रहने से घरेलू मांग में कमी के साथ साथ कमजोर धारणा और बढ़ती लागत का भी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा.
इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने जून में 2019-20 के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 7.2 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत कर दिया था. घरेलू गतिविधियों में सुस्ती और वैश्विक व्यापार युद्ध को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया था.
वहीं केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के जारी आंकड़ों के मुताबिक 2018- 19 में भारत की जीडीपी वृद्धि पांच साल के न्यूनतम स्तर तक गिर गई और जनवरी- मार्च तिमाही में यह 5.8 प्रतिशत रही.