आर्थिक मोर्चे पर होगी मोदी सरकार की कड़ी परीक्षा


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आम चुनाव खत्म हो चुके हैं और बीजेपी की अगुआई वाला एनडीए गठबंधन एक बार फिर से प्रचंड बहुमत के साथ उभर कर आया है. लेकिन फिलहाल आर्थिक मोर्चे पर उसके सामने कई चुनौतियां हैं. इसके चलते औद्योगिक टैक्स दर और ब्याज दरों में तत्काल कटौती के लिए जबरदस्त लॉबिंग की जा रही है.

साल की तीसरी तिमाही (अक्तूबर से दिसंबर) में विकास दर बीती पांच तिमाहियों में सबसे कम रही. इस दौरान जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.6 पर आ पहुंची.

इसके अलावा जानकार इस बात को लेकर चिंता जता रहे हैं कि जब आगामी 31 मई को चौथी तिमाही के आंकड़े जारी किए जाएंगे, तो इसमें और गिरावट संभव है. कुछ लोगों का मानना है कि इस दौरान वृद्धि दर घटकर 6.4 फीसदी के स्तर तक जा सकती है.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए वृद्धि दर के अनुमान को पहले ही 7.2 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया है.

दूसरी ओर देश का औद्योगिक उत्पादन भी लगातार घटता नजर आ रहा है. बीती मार्च में ये 0.1 फीसदी और सिकुड़ गया. यहां सबसे ज्यादा चिंताजनक विनिर्माण उद्योग में घटता उत्पादन है. इस दौरान इस क्षेत्र में 0.4 फीसदी की कमी दर्ज की गई. जो फरवरी महीने में 0.3 फीसदी रही थी.

इसके अलावा खपत में भारी कमी और औद्योगिक क्षेत्र की कमाई में गिरावट के संकेत पहले ही जनवरी से मार्च की तिमाही के दौरान सामने आ चुके हैं.

इसके अलावा आईएमएफ भी बीते महीने वैश्विक विकास दर में कमी की बात कह चुका है. आईएमएफ ने साल 2019 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान 3.3 फीसदी कर दिया है, जबकि बीते साल ये 3.6 फीसदी रही थी.

इन सबका सीधा मतलब है कि अगर घरेलू अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखना है तो बजट में राजस्व प्रोत्साहन की जरूरत होगी.

उधर फिक्की की ओर से जारी एक टिप्पणी में कहा गया है कि वृद्धि दर में कमी की वजह सिर्फ निवेश में कमी या कम निर्यात नहीं है. इसकी एक वजह घरेलू खपत में कमी भी है. फिक्की के मुताबिक सरकार आगामी बजट में इसके लिए प्रावधान कर सकती है.

फिक्की की ओर से कहा गया, “ये बहुत चिंताजनक मामला है, अगर जल्द ही इससे निजात के उपाय नहीं किए गए तो ये लंबा खिंच सकता है.”

हाल में आए औद्योगिक आंकड़े उद्योग जगत के माथे पर चिंता की लकीरें खींचते नजर आते हैं. इस दौरान दो पहिया और चार पहिया वाहनों की बिक्री में लगातार कमी नजर आई है.

इसके अलावा बीते पांच सालों में पहली बार हवाई यात्रियों में भी 4.5 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है.

कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री प्रमुख विक्रम किर्लोस्कर कहते हैं कि सरकार को टैक्स दर में कमी करने की जरूरत है, इसके अलावा उसे निवेश को बढ़ाने के लिए सभी तरह के उपाय करने होंगे.

इसके अलावा भारत को वैश्विक स्तर पर भी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. ब्रिटेन और अमेरिका ने अपने यहां टैक्स दर में काफी कटौती की है. इस दौरान अमेरिका में 21 फीसदी टैक्स कटौती की गई है. वहीं ब्रिटेन में 17 फीसदी की कटौती हुई है.


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