2018 में भारत को मिला 4,200 करोड़ का FDI
भारत को साल 2018 में कुल चार हजार दो सौ करोड़ रुपये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के रूप में हासिल हुए हैं. यूएन की ट्रेड रिपोर्ट से ये आंकड़े सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इस निवेश को विनिर्माण, संचार और वित्तीय सेवाओं में हुए अच्छे निवेश के चलते मदद मिली है.
दक्षिण एशिया के बारे में रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां आने वाला कुल एफडीआई 3.5 फीसदी की वृद्धि के साथ 5,400 करोड़ रहा.
व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन(अंकटाड) की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने दक्षिण एशिया में होने वाले कुल निवेश का 77 फीसदी हिस्सा अपनी ओर आकर्षित किया है.
रिपोर्ट के कहा गया है, “भारत में निवेश…उपक्षेत्र का सबसे बड़ा प्रापक…छह फीसदी की बढ़त के साथ 4,200 करोड़ पर जा पहुंचा, जिसमें विनिर्माण, संचार, वित्तीय सेवाएं और अंतर-सीमा विलय में मजबूत निवेश शामिल है.”
भारत के मामले में सीमा पार से विलय और अधिग्रहण 2017 के 2,300 करोड़ से बढ़कर 3,300 करोड़ पहुंच गया. इस दौरान खुदरा व्यापार 1,600 करोड़ रहा. जिसमें ई-कॉमर्स और टेलीकम्युनिकेशन का 1,300 रुपया शामिल है.
इस दौरान अधिग्रहण के मामले में भारत की सबसे ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकॉर्ट सबसे ऊपर रही. इसका वालमार्ट के साथ विलय एक बहुत बड़ा समझौता था. इसके बाद दूसरे नंबर पर वोडाफोन की टेलीकम्युनिकेशन डील रही.
रिपोर्ट में दूसरे दक्षिण एशियाई देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के आंकड़े भी दिए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका और बांग्लादेश में निवेश रिकॉर्ड स्तर पर रहा. इस दौरान श्रीलंका में कुल 360 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, वहीं बांग्लादेश में 160 करोड़ रुपये एफडीआई के रूप में आए.
उधर पाकिस्तान में होने वाली एफडीआई में 27 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि एशिया के विकासशील देशों में होने वाले एफडीआई में कुल 3.9 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.
यूएन की इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत समेत कई देशों ने एफडीआई को आकर्षित करने के लिए नीतिगत उपाय किए हैं. भारत ने इसके लिए पोर्ट सेक्टर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के लिए समझौते किए हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में कुल 5,400 विशेष आर्थिक जोन (सीईजेड) हैं. इसमें से एशिया के विकासशील देशों में ही 4,000 से अधिक हैं.
एशिया के इन देशों में चीन इस मामले में सबसे ऊपर है. यहां 2,543 विशेष आर्थिक जोन हैं. जबकि भारत में 373 विशेष आर्थिक जोन हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने इस क्षेत्र में नीतियों को लेकर प्रयोग करना जारी किया हुआ है. चीन खासकर वित्त और स्वास्थ्य क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए नियमों को आसान बना रहा है.
इसमें कहा गया है, “भारत, कोरिया गणराज्य, फिलीपींस और तुर्की सूचना और प्रद्योगिकी जोन पर ध्यान दे रहे हैं, जबकि पश्चिम एशिया सेवा क्षेत्र और दक्षिण-पूर्वी एशिया विनिर्माण क्षेत्र पर अधिक ध्यान दे रहा है.”