भारतीय शेयर बाजार में गिरावट बरकरार रहने के आसार


Sensex down 769 points to close at 36562; Stock market falls heavily

 

भारतीय शेयर बाजार इस वक्त अधर में है. इसके लिए ना ही घरेलू बाजार अनुकूल है और न ही विदेशी. घरेलू निवेशक कर नियमों को लेकर परेशान हैं, जबकि विदेशी निवेशक सरकार के अनुच्छेद 370 हटाने से चिंतित हैं क्योंकि इससे पड़ोसी देशों के बीच तनाव पैदा होगा. इसके अलावा चीन और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक तनातनी से चीजें और बिगड़ रही हैं.

सोमवार 5 अगस्त को निफ्टी इंडेक्स में 1.3 फीसदी के साथ 134.75 अंक की गिरावट दर्ज की गई. इसमें ज्यादातर उभरते बाजार (ईएम) हैं. अबतक 2019 में एमएससीआई (मॉर्गन स्टैन्ली कैपिटल इंटरनेशनल) ईएम (इमर्जिंग मार्केट) इंडेक्स में भारतीय बाजार का खराब प्रदर्शन रहा है.

अनुच्छेद 370 को रद्द करने के अलावा चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव से बाजार में लगातार गिरावट हो रही है.

बाजार मामलों के जानकार अजय बग्गा ने कहा, “कमाई में कोई वृद्धि नहीं है. दिशाहीनता और बाजार में उत्तेजना की कमी होना बहुत खतरनाक संयोजन है. आज के बाद हम यह उम्मीद कर रहे हैं कि कुछ सुधार के कदम उठाए जाएंगे क्योंकि ध्यान अब वापस से अर्थव्यवस्था की ओर आने वाला है.”

पहली तिमाही के खराब नतीजों से साफ है कि कमाई में वृद्धि ना होना सबसे अहम परेशानी बनी हुई है. कुछ उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनियों को छोड़ दें तो बाकियों की कमाई में वृद्धि नगण्य रही है. बैंकों को कमाई में वृद्धि करने के लिए मददगार साबित होना था लेकिन वो भी असफल रहा.

अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव के चलते विदेशी बाजारों में भी तनाव है. साथ ही उभरती हुई अर्थव्यवस्था में वृद्धि दर की रफ्तार भी धीमी है.

रिलायंस सेक्युरिटीज लिमिटेड के शोध के प्रमुख नवीन कुलकर्णी ने कहा, “इसकी वजह से बाजार में दरों में लगातार गिरावट हो रही है. हमने निफ्टी से हने वाली कमाई को 7 फीसदी से 8 फीसदी तक कम कर दिया है. अर्थव्यवस्था में मंदी और कॉरपोरेट कमाई में कमी इसकी वजह है.”

मॉर्गन स्टैन्ली इंडिया कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक व्यापार युद्ध से अंतरराष्ट्रीय वृद्धि में कमी आएगी. उनका कहना है, “अगर अमेरिका चार से छह महीनों के लिए चीन के सभी आयातों पर 25 फीसदी का शुल्क लागाता है, और चीन इस संबंध में जवाबी कार्यवाही करता है , तो हमें विश्वास है कि हम तीन तिमाहियों में वैश्विक मंदी के दौर से गुजरने लगेंगे.”

व्यापार युद्ध के चलते विनिमय दर पहले से ही प्रभावित है. डॉलर के मुकाबले रुपया 70 पहुंच चुका है. और यह खतरा लगातार बढ़ रहा है कि आगे भी रुपये में गिरावट हो सकती है. जब भी भारत के पड़ोसी देशों से जुड़ी जोखिम सामने आया है, इसका प्रभाव रुपये के मूल्यों में भी पड़ा है, जिससे जोखिम का सामना करना पड़ा है.

चीन की मुद्रा युआन डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुई, जिससे भारतीय मुद्रा भी प्रभावित हुई. यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकती है.

विश्लेषकों का मानना है कि अगर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की स्थिति जस की तस बनी रही तो भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 71 रुपये के पार जा सकता है.

भारतीय बजारों के लिए इस तराजू को बराबर करना बहुत मुश्किल है. वैश्विक स्तरों पर चाहे जो भी हो लेकिन बाजार को जिस चीज की जरूरत है वो है कंपनियों की कमाई में पुन: प्रवर्तन करना. माना जा रहा है कि बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक दरों की कटौती करेगी जिससे कुछ राहत मिलने के आसार हैं.


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