मारुति के स्टॉक में गिरावट, ऑटो सेक्टर में गहराते संकट की ओर इशारा
मारुति सुजूकी इंडिया के शेयरों में इस साल बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इसके चलते भारत की इस सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी के भविष्य पर संकट के बादल नजर आने लगे हैं. कंपनी इस समय कई तरह की समस्याओं से जूझ रही है, इनमें खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सरकारी नियम, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लगातार मांग में कमी शामिल है.
मारुति की घरेलू बिक्री जून में समाप्त हुई तिमाही में 19 फीसदी से ज्यादा गिरी है. कंपनी की घरेलू बिक्री में 2000-01 की तीसरी तिमाही के बाद से ये अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है. इस वजह से कंपनी की वित्तीय हालत और स्टॉक प्रदर्शन दोनों प्रभावित हुए हैं.
कंपनी के खराब प्रदर्शन का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस वित्तीय वर्ष में सेंसेक्स में 4.49 फीसदी के इजाफे के बावजूद मारुति के स्टॉक में 25.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. बीते साल भी इसका प्रदर्शन अच्छा नहीं था, उस दौरान इसके स्टॉक में 23.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
एक संबंधित विश्लेषक ने पहचान छिपाने की शर्त पर मिंट को बताया, “फिलहाल भविष्य में बड़े पैमाने पर कार बाजार में मांग बढ़ने की कोई सूरत नजर नहीं आती. इसके चलते स्टॉक बुरे दौर से गुजर रहा है.”
उन्होंने बताया कि मौलिक रूप से कंपनी अब भी काफी मजबूत है और बाजार में अपनी श्रेष्ठता बनाए रखेगी, लेकिन निकट भविष्य में मांग में बढ़ोतरी होनी की संभावना नजर नहीं आती.
ऑटोमोबाइल उद्योग में बीते 10 महीने से मंदी जैसी स्थिति बनी हुई है और इसमें सुधार होने के कोई संकेत भी नजर नहीं आ रहे हैं. इसके चलते कई ब्रोकरेज ने मारुति के शेयरों को डाउनग्रेड कर दिया है. जानकारों को लगता है कि आगामी त्योहारी सीजन में भी इसमें कोई खास सुधार होने की संभावना नहीं है.
इन सबके बीच नियामक परिवर्तन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते भी कंपनी के स्टॉक पर दबाव बने रहने की उम्मीद जताई जा रही है.
देश में यात्री वाहनों की बिक्री में तेज गिरावट देखी गई है. बीते जून में समाप्त हुई तिमाही में यात्री वाहनों की बिक्री में 2000-01 के बाद सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. इसके चलते कार बाजार की अगुवा मारुति को अपना उत्पादन भी घटाना पड़ा.
अगर लाभ की बात करें तो इसमें भी मारुति को काफी नुकसान उठाना पड़ा है. जून में समाप्त तिमाही में उसके लाभ में 27 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. बीते पांच सालों में ये सबसे बड़ी गिरावट थी.
इस दौरान कंपनी के लाभ मार्जिन यानी शुद्ध मुनाफे में भी बड़ी गिरावट आई. कंपनी का लाभ मार्जिन 10.92 फीसदी की गिरावट के साथ 455 बेसिस अंक गिर गया. इस दौरान कंपनी की शुद्ध बिक्री में 14 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.