आईडीबीआई बैंक को 9,000 करोड़ रुपये देगी सरकार


fraud related incidents increased in banks

 

सरकार ने तीन सितंबर को आईडीबीआई बैंक को 9000 करोड़ रुपये देने के फैसले को स्वीकृति दे दी है. इसका मकसद बैंक की कर्ज देने की क्षमता को बढ़ाना है.

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आईडीबीआई बैंक में एक बार में पूंजी डालने को मंजूरी प्रदान कर दी है. यह पूंजी सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम दोनों की ओर से डाली जाएगी.

उन्होंने कहा कि इस 9,000 करोड़ रुपये में से सरकार एक बार में 4,557 करोड़ रुपये आईडीबीआई बैंक में डालेगी. वहीं एलआईसी 4,700 करोड़ रुपये की पूंजी डालेगी.

इससे पहले रिजर्व बैंक ने लाभांश और अधिशेष कोष के मद से 1.76 लाख करोड़ रुपये सरकार को हस्तांतरित करने का निर्णय किया है.

रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने आरबीआई के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद यह कदम उठाया गया है.

इसके बाद सरकार ने 30 अगस्त को कुल दस बैंकों के विलय की घोषणा की थी. विलय के बाद चार नए बैंक सामने आएंगे.

इन दस बैंकों में पंजाब नैशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, यूनाइटेड बैंक, केनरा बैंक, सिंडिकेट बैंक, यूनियन बैंक, आंध्रा बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक शामिल हैं.

इस विलय का बैंक कर्मचारी संघों ने विरोध किया था. इसके बाद निर्मला सीतारमण ने जवाब में कहा कि विलय के इन निर्णयों से किसी एक कर्मचारी की भी नौकरी नहीं जाएगी.


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