रोजगार में कमी और खराब मानसून के चलते ग्रामीण उपभोक्ता खर्च में गिरावट


fmcg revenue growth to be worst in last fifteen years

 

ग्रामीण उपभोक्ता रोजमर्रा के उपयोग वाली जरूरी चीजें खरीदने में संकोच कर रहे हैं. इसके चलते जल्दी बिकने वाली उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) की बिक्री में लगातार कमी आ रही है. अनुसंधान फर्म कांतार वर्ल्ड पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 31 मई के पहले के 12 महीनों के दौरान देश के अंदरूनी क्षेत्रों में एफएमसीजी की बिक्री में कमी दर्ज की गई है.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान ग्रामीण परिवारों ने खाद्य सामग्री जैसे आटा, तेल, नमक और घरेलू प्रयोग की अन्य चीजें जैसे कपड़े धोने का पाउडर आदि कम खरीदे जिसके बिक्री में कमी दर्ज की गई.

इन 12 महीनों में ग्रामीण भारत में एएफएमसीजी की बिक्री में दो फीसदी की कमी दर्ज की गई. वहीं शहरी क्षेत्रों में भी एक फीसदी की कमी दर्ज की गई. हालांकि इस दौरान निजी उपयोग की चीजें और डिब्बाबंद खाने की बिक्री में इजाफा रहा.

इस अध्ययन के दौरान कांतार ने घरेलू उपयोग में आने वाली ब्रांडेड और गैर ब्रांडेड दोनों तरह की 90 एफएमसीजी वस्तुओं को अपनी गणना में शामिल किया.

कांतार की ओर से बताया गया कि गैर कृषि रोजगार में कमी और खराब मानसून के चलते आतंरिक क्षेत्रों में रोजमर्रा के सामान की बिक्री में कमी आई है.

कांतार दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक के रामाकृष्णन कहते हैं, “ग्रामीण भारत का काफी हिस्सा कम बारिश के चलते प्रभावित हुआ और जब पानी की कमी होती है तो उसका सीधा असर एफएमसीजी कैटेगरी पर पड़ता है.”

उन्होंने बताया कि ग्रामीण भारत में गैर कृषि रोजगार में भी कमी आई है, जिसका सीधा प्रभाव इन वस्तुओं की बिक्री पर पड़ रहा है.

हालांकि रामाकृष्णन ने ये बात भी कही कि अप्रैल के बाद से इसमें थोड़ा सुधार देखा जा रहा है. उन्होंने कहा, “तिमाही आधार पर हमने मांग में कुछ सकारात्मक सुधार देखे हैं.”

अध्ययन के मुताबिक 31 मई तक के 12 महीनों के दौरान ग्रामीण उपभोक्ताओं ने औसतन एक महीने में एफएमसीजी वस्तुओं की खरीदारी में 3,134 रुपये खर्च किए. ये इससे पहले के 12 महीनों के दौरान खर्च से थोड़ा कम थे.


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