‘जन विरोधी’ नीतियों के खिलाफ चक्का जाम
सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता लगातार सड़कों पर है. करीब एक महीने पहले ही 28-29 नवंबर को देश भर के किसान मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर थे. फिर बैंक कर्मचारियों का दो दिवसीय हड़ताल हुई. अब देश भर के कामगार सरकार के खिलाफ चक्का जाम पर हैं. इस हड़ताल में देश भर के करीबन 10 ट्रेड युनियन शामिल हैं. ऑल इंडिया बैंक कर्मचारी एसोसिएशन और बैंक एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी इसे समर्थन दिया है.

अब की बार देश का भर का गरीब-गुरबा, मजदूर-किसान और कामगार पूरे जोर से कह रहा है, “सिहांसन खाली करो कि जनता आती है”.

हक की लड़ाई में देश का निचला तबका कमर कस चुका है. आसमान में लहरा रही ये मुठ्टी इस सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है.

पटना में जनता विरोधी नीतियों के खिलाफ लामबंद हड़ताली.

ट्रेड यूनियनों के इस हडताल में रिजर्व बैंक के कर्मचारी भी आगे हैं.

कोलकाता में एक डाकघर के बाहर पसरा सन्नाटा. यहां के कर्मचारी भी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं.

यह तस्वीर बता रही है कि मुंबई में ट्रेड यूनियन की जमीन गहरी रही है. हालांकि बाद के दिनों में कॉरपोरेट राजधानी में मजदूर और यूनियन के नेताओं पर काफी दमन हुए.

भुवनेश्वर में सड़कों पर ठहरा ट्रकों का रेला.

जम्मू में सरकार की नीतियों के खिलाफ नारा उठाते हुए सीटू ट्रेड यूनियन के सदस्य.

गुवाहाटी में वाम ट्रेड यूनियन का झण्डा लिए ट्रेन रोकते हुए हड़ताली.

भुवनेश्वर में सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर टायर भी जलाए गए.

जब हड़ताल हो ही गई है तो क्यों ना कुछ गपशप हो जाए. शायद यही सोच रहे हैं परिवहन विभाग के कर्मचारी

कोलकाता में एयरपोर्ट के बाहर सवारी के इंतजार में खड़े लोग. हड़ताल की वजह से सड़कों पर परिचालन ठप्प है.

अमृतसर में सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ प्लेकार्ड थामे हुए शिक्षक.

लखनऊ में प्रदर्शन करते हुए बीमा कर्मचारी

हड़ताल के दौरान रेहड़ी-पटरी की दुकाने भी बंद रहीं.