आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों से घिरीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
आर्थिक मोर्चे पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने एक साथ कई चुनौतियां मुंह पसारे खड़ी हैं. बीते शुक्रवार को ऐसी ही कई चुनौतियों से उनका साबका हुआ. अंग्रेजी समाचार पत्र टेलीग्राफ ने इनके बारे में विस्तार से लिखा है.
उद्योग जगत के कुछ अग्रणी लोगों ने वित्त मंत्री से मुलाकात के दौरान कैफे कॉफी डे के मृत संस्थापक वीजी सिद्धार्थ का मुद्दा उठाया. खबरों के मुताबिक वीजी सिद्धार्थ को टैक्स अधिकारियों ने लगातार परेशान किया था. हालांकि इस आरोप को टैक्स विभाग लगातार नकारता रहा है.
अखबार लिखता है कि गोदरेज समूह के अध्यक्ष आदि गोदरेज ने वित्त मंत्री से मुलाकात के बाद कहा, “बहुत से कदम उठाने की जरूरत है. अर्थव्यवस्था सुस्त हो चुकी है. दुर्भाग्यवश बजट में भी इसे उबारने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं…मुझे उम्मीद है कि सरकार कुछ करेगी.”
उधर ऑटो कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा ने घोषणा की है कि वो आठ से लेकर चौदह दिन के लिए अपना उत्पादन रोकेगी. ऐसा मांग में कमी के चलते किया जा रहा है. टाटा मोटर्स पहले ही कुछ ऐसी ही घोषणा कर चुकी है.
इसके अलावा वित्त मंत्री पूंजी बाजार के प्रतिनिधियों से भी मिलीं. इस दौरान इन लोगों की ओर से एक मांगपत्र पेश किया गया. इसमें एफपीआई पर लगाया गया टैक्स सरचार्ज हटाने की मांग भी शामिल है.
अखबार लिखता है कि इसी दिन शाम को एक निराशा का पल तब और आया जब सीएएसओ ने आंकड़े जारी किए. इनमें बताया गया कि जून के महीने में औद्योगिक उत्पादन दो फीसदी गिरकर चार महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया.
इससे पहले औद्योगिक प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान निर्मला सीतारमण ने टैक्स छापों को लेकर उनकी चिंताओं को कम करने का प्रयास किया. उद्योग क्षेत्र ने खुलकर बोलने वाले उद्योगपतियों पर एकतरफा कार्यवाही को लेकर चिंता जताई है.
औद्योगिक जगत में खराब अर्थव्यवस्था की हालात में सुधार के लिए कोई बजटीय प्रावधान ना होने की लगातार आलोचना हो रही है. पांच जुलाई को पेश बजट में औद्योगिक क्षेत्र को किसी तरह का लाभ नहीं दिया गया है और ना ही बाजार को किसी तरह की टैक्स छूट दी गई है.
हालांकि वित्त मंत्री टैक्स प्रताड़ना पर लगाम लगाने के उपायों को लागू करने की बात कह रही हैं. उन्होंने कहा है कि अगले हफ्ते से वे देश भर में अलग-अलग जगहों पर औद्योगिक प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगी.
इसके अलावा उन्होंने एक तकनीकी आधारित प्लेटफॉर्म बनाने की बात भी कही है. जहां वे खुद टैक्स उत्पीड़न जैसी शिकायतों को देखेंगी.
वित्त मंत्री ने उद्योग जगत से वादा किया है कि सरकार कंपनी एक्ट में हुए सुधारों पर एक बार फिर से पुनर्विचार करेगी. इस एक्ट में सुधार के बाद सीएसआर में गड़बड़ी करने पर 25 लाख का जुर्माना और तीन साल की सजा का प्रावधान जोड़ दिया गया है.
उन्होंने इस संबंध में कहा कि हमारा मकसद किसी पर आपराधिक मुकदमा चलाना नहीं है.