बजट से निराश होकर भारत से अपना पैसा निकाल रहे हैं विदेशी निवेशक
केंद्रीय बजट से निराश विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से निरंतर पैसा निकल रहे हैं. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक जुलाई महीने में अब तक 4,776.96 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. ये गिरावट मुख्यत: केंद्रीय बजट में सुपर रिच टैक्स लगाए जाने के बाद से आई है.
जनवरी के बाद से ये दूसरा महीना है जब एफपीआई निवेश निगेटिव होने जा रहा है. एफपीआई निवेश में ये कमी मुख्यत: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट के बाद आई है. इसके पहले जनवरी महीने में भी एफपीआई ने 4262 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी.
दरअसल, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट में मार्च महीने के बाद से ही लगातार गिरावट देखी जा रही है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के डेटा के अनुसार मार्च में जहां फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई ) ने नेट 33981 करोड़ रुपये का निवेश किया था, वहीं अप्रैल और मई में ये घटकर क्रमशः 21193 और 7920 करोड़ रुपये रह गया था. जून में तो ये चालू वित्त वर्ष में सबसे कम 2596 करोड़ रुपये रह गया. वैसे जून महीने में कुल एफपीआई निवेश 13,111 करोड़ रुपये था, जिसमें 8,319 करोड़ रुपये डेट में और 2,196 करोड़ रुपये हाईब्रीड सिक्योरिटीज में निवेश किए गए थे.
एफपीआई निवेश में गिरावट का मुख्य कारण वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सुपर रिच पर इनकम टैक्स सरचार्ज में की गई बढ़ोतरी को माना जा रहा है. वित्त मंत्री ने बजट में 2 करोड़ से 5 करोड़ की कर योग्य आय पर सरचार्ज 15 से बढाकर 25 प्रतिशत कर दिया जबकि 5 करोड़ से ऊपर की आय पर सरचार्ज अब 37 प्रतिशत लगेगा. कुल मिलाकर अब सुपर रिच पर आयकर की नेट दर क्रमश: 39 और 42.7 प्रतिशत हो गई है.
चूंकि, लगभग 40 प्रतिशत एफपीआई निवेश नॉन कॉर्पोरेट एंटिटी जैसे ट्रस्ट अथवा एसोसिएशन ऑ पर्सन्स के रूप में किया जाता है, इसलिए उनपर भी व्यक्तिगत आयकर दाता की तरह सुपर रिच टैक्स लगेगा.
इसलिए आशंका है कि एफपीआई निवेश में आगे चलकर और कमी आ सकती है. इसका संकेत इस बात से भी मिलता है कि बजट के एक सप्ताह बाद एफपीआई निवेश नेगेटिव हो चुका है. भारतीय इक्विटी मार्किट में हाल में आई गिरावट का ये एक प्रमुख कारण है.