पांच साल के सबसे निचले स्तर पर रही अर्थव्यवस्था वृद्धि दर: पोल
रायटर्स के एक पोल के अनुसार जून तिमाही में कमजोर निवेश और सुस्त मांग से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले पांच साल की सबसे धीमी गति से आगे बढ़ी.
इसने अगस्त में हुई रिजर्व बैंक की बैठक में उठी इस बात को सुदृढ़ किया है, जिसमें नीतिनिर्माता कमजोर मांग को लेकर चिंतित थे और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अगले कुछ महीनों में और अधिक रेट कट की बात कह रहे थे.
पोल ने दिखाया कि जून तिमाही में अर्थव्यवस्था के साल-दर-साल आधार पर 5.7 प्रतिशत से बढ़ने का अनुमान था. यह दर पिछली तिमाही की वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत से थोड़ी कम थी. लेकिन पोल में शामिल 40 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने माना कि जून तिमाही में अर्थव्यवस्था और भी कम वृद्धि दर 5.6 प्रतिशत से आगे बढ़ी.
आगामी 30 अगस्त को जून तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर का डेटा जारी होगा. अगर पोल का अनुमान सही निकला तो यह पिछले सात सालों में किसी वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में सबसे धीमी शुरुआत होगी.
तरलता की कमी की वजह से भारत में यात्री वाहनों की बिक्री जुलाई में पिछले दो दशकों में सबसे कम रही. इसकी वजह से इस क्षेत्र में हजारों की संख्या में लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया.
उपभोग और निवेश के कमजोर होने के साथ अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध ने भी भारत में मांग और बिजनेस कॉन्फिडेंस पर नकारात्मक प्रभाव डाला है.
रायटर्स के पोल में वित्त वर्ष 2019-20 में कमजोर शुरुआत के बाद भी जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत लगाया गया है. हालांकि, यह अनुमान एक महीने पहले लगाए गए वृद्धि दर के अनुमान 6.8 और आरबीआई के अनुमान 6.9 प्रतिशत से काफी कम है.
वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस आर्थिक मंदी से निपटने के लिए अनेक घोषणाएं कर चुकी हैं. इनमें विदेशी और घरेलू इक्विटी निवेशकों पर हाल ही में बढ़ाकर लगाए गए टैक्स को वापस लेना प्रमुख है.