प्रधानमंत्री के सलाहकार ने अर्थव्यवस्था को लेकर जताई चिंता
प्रधानमंत्री को आर्थिक सलाह देने वाली परिषद के सदस्य रतिन रॉय ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था उस तरह के राजकोषीय घाटे से जूझ रही है, जो दिखाई नहीं दे रहा है. उन्होंने कहा कि कर संग्रह में कमी को केंद्र में रखकर सरकार को अपनी योजनाओं पर एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए.
रतिन रॉय ने कहा कि सरकार को किसी बड़ी सार्वजनिक सलाह पर विचार किए बिना विदेशी कर्ज नहीं लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे के समर्थन में गढ़े गए तर्कों में कोई दम नहीं है.
केंद्रीय बजट के ऊपर पांच थिंक टैंकों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए रॉय ने कहा, “मैं उन बातों पर बहुत सावधानीपूर्वक ध्यान दूंगा, जिनमें रिजर्व बैंक के गवर्नरों ने कहा है कि सभी देनदारियां स्थाई हैं. मुझे लगता है कि संप्रभुता में कमी का मुद्दा काफी गंभीर है और इसके ऊपर ध्यान दिए जाने की जरूरत है. मुझे नहीं लगता कि जो भी चीज सस्ती है वो अच्छी है. मैं इस तरह के तर्कों को ठोस नहीं मानता.”
उन्होंने कहा, “मैं बहुत सम्मानपूर्वक कहता हूं कि विदेशी कर्ज लेने की राजशाही घोषणा की जगह इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए, इसके साथ ही इस मुद्दे पर सलाह भी लेनी चाहिए.”
रॉय ने यह भी कहा कि चाहे दक्षिण अमेरिका हो या फिर यूरोप, जिस किसी भी देश ने विदेशी बॉन्ड जारी किए हैं, इससे पैदा हुई देनदारियों को लेकर उनके अनुभव अच्छे नहीं रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा, “मेरे पेशेगत निर्णय के आधार पर सरकार 2019-20 के बजट में निर्धारित टैक्स संग्रह नहीं कर पाएगी. ऐसे में सरकार को या तो ज्यादा कर्ज लेना पड़ेगा या फिर खर्च कम करना पड़ेगा. दोनों ही स्थितियों में अर्थव्यवस्था उलझेगी.”