शेयर मार्केट की हालत खस्ता, IPO लाने वाली कंपनियों की संख्या आधी रह गई


Dry spell in IPO market Only 11 cos hit bourses this yr compared to 24 in 2018

 

इस साल की पहली छमाही में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने वाली कंपनियों की संख्या आधी रह गई. वहीं आईपीओ अब तक संख्या और मूल्यांकन दोनों में ही कम रहा है. अनुमान के मुताबिक इस साल की दूसरी छमाही में आईपीओ आगे और सिकुड़ सकता है.

निवेश बैंकरों ने कहा कि घरेलू और वैश्विक समस्याओं के चलते शेयर बाजार में वोलैटिलिटी बढ़ी है यानी कि हालत खस्ता हैं.

एफल लिमिटेड, स्पंदना स्फूर्ति फाइनेंशियल और स्टर्लिंग एंड विल्सन सोलर लिमिटेड के आईपीओ ने बीते हफ्तों में बाजार में दस्तक दी. एफल के आईपीओ को जहां ज्यादा संख्या में सब्सक्राइब किया गया वहीं बाकि के दो लक्ष्य तक पहुंचने में नाकामयाब रहे.

लाइव मिंट की खबर के मुताबिक आईपीओ की संख्या बीते तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.

मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के कार्यकारी अध्यक्ष मुकुंद रंगनाथ ने कहा, “इस साल बाजार की परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण रही हैं और अब आगे इस साल आईपीओ बाजार में मजबूती आना मुश्किल है.”

उन्होंने कहा, अगर साल अच्छा रहता है तो सालाना 30 अच्छे आईपीओ देखने को मिलते हैं.

आईआईएफएल के निवेश बैंकिंग के प्रमुख निपुन गोयल ने कहा, “फिलहाल सेबी के पास 50 ड्रॉफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल हैं जो आईपीओ पेश करने की कतार में हैं. इनमें से कुछ की मंजूरी की समय सीमा अगले कुछ महीने में खत्म हो जाएगी. मार्केट में वोलैटिलिटी को देखते हुए कंपनियां प्राइवेट इक्विटी फंड जैसे विकल्पों पर गौर कर सकती हैं.”

एसएंडआर एसोसिएट के संस्थापक सदस्यों में शामिल संदीप भगत ने कहा, “जिन कंपनियों की मंजूरी इस साल सितंबर आखिर से दिसंबर के बीच खत्म हो रही है वो भी इस साल आईपीओ पेश करने को लेकर जल्दबाजी नहीं करेंगी.”

उन्होंने कहा, “..पर छोटे वित्तीय बैंकों को अगर आरबीआई से राहत नहीं मिलती है तो उन्हें नियामक आवश्यकताओं के चलते आईपीओ पेश करने पड़ सकते हैं.”

साल खत्म होने में अब चार महीने बचे हैं और अब तक केवल 11 कंपनियों ने आईपीओ सार्वजनिक किए हैं, जिन्होंने अब तक 10,049 करोड़ रुपये जुटाए हैं. जबकि बीते साल 24 आईपीओ ने 30,959 करोड़ रुपये जुटाए थे.


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