आईएसआई के सहारे खालिस्तान आंदोलन खड़ा करने की कोशिश


Under ISI protection KLF wants to revive Khalistan movement in india

 

अमृतसर के राजासांसी गांव में निरंकारियों की सभा पर 18 नवंबर को हुए हमले का आरोपी केएलएफ से जुड़ा हुआ है. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बताया कि हमलावर प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) से जुड़े हुए हैं.

अमृतसर बम धमाका मामले में 26 साल के बिक्रमजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया है. एक दूसरे आरोपी की पहचान अवतार सिंह के रूप में हुई है. दोनों आरोपियों से पूछताछ में सामने आया है कि वे केएलएफ से जुड़े हुए हैं.

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार साल 1980 में एक्टिव रहा कट्टर संगठन केएलएफ, पाकिस्तानी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के दबाव में 2009 में मलेशिया में एक बार फिर शुरू हुआ था.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल केएलएफ का अध्यक्ष अमृतसर का रहने वाला हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी है. यह संगठन पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई के संरक्षण में काम कर रहा है.

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) के मुताबिक हरमीत सिंह साल 2008 से लाहौर के गुरुद्वारा बिबि नानकी में रह रहा है. हरमीत दूर देशों के लोगों को कट्टर बनाने और भड़काने के लिए स्काईप का इस्तेमाल करता है. हरमीत ने इटली में बसे सिख युवक हरदीप सिंह को पहले तो स्काइप के माध्यम से कट्टरपंथी बनाया. इसके बाद उसने हरदीप को भारत में हमले करने के लिए भी मना लिया.

हरदीप हर बार किसी हमले को अंजाम देने के लिए इटली से भारत आता है.

एनआईए ने मई में इस कट्टर संगठन द्वारा किए गए हमलों को पता लगाने की कोशिश की थी. जिसमें यह सामने आया कि केएलएफ ने पंजाब में साल 2016 से 2017 के बीच आठ खून किए, जिसमें आरएसएस और पादरी पर किए जानलेवा हमले भी शामिल हैं.

एनआईए ने इन हमलों के लिए हरमीत और एक सिलाई मशीन कारीगर रमनदीप को आरोपी ठहराया है.

एनआईए के मुताबिक केएलएफ का प्रमुख उद्देश खालिस्तान को आजाद करना है. 1986 में अरूर सिंह ने इसे शुरू किया था. जिसके बाद उसने साल 1994 तक कई संप्रदायिक गतिविधियों को अंजाम दिया.

एनआईए ने कहा कि, “केएलएफ के नेताओं का मानना है कि वह लगभग खत्म हो गए खालिस्तान आंदोलन को एक विशेष समुदाय के लोगों पर निशाना साध कर और पंजाब के लोगों में संप्रदाय के आधार पर फूट डाल कर एक बार फिर आगे बढ़ा सकते हैं. जरनैल सिंह भिंडरांवाले के विचारों का विरोध करने वाले लोग केएलएफ के प्रमुख टारगेट होते हैं. संगठन के सदस्य सोशल मीडिया पर भी गहरी नजर रखते हैं और उन लोगों को अपना टारगेट बनाते हैं जो सिख विरोधी विचार रखते हैं.”


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