महिला जजों की कमी से जूझते हाई कोर्ट


lack of women judges in indian high courts

 

देश के न्यायिक क्षेत्र में जिम्मेदार पदों पर बैठी महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले बहुत कम है. जानकारी के मुताबिक इस समय पूरे देश के सभी हाई कोर्ट में कुल 670 जज सेवारत हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या सिर्फ 73 है.

ये जानकारी सरकार की तरफ से एक संसदीय कमिटी को दी गई है.

इस दौरान दिए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के हाई कोर्ट जजों की कमी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. सरकार ने बताया कि 23 मार्च 2018 तक जजों की मंजूर संख्या एक हजार 79 थी, जबकि इस दौरान सिर्फ 670 जज ही कार्यरत थे. इस तरह से कुल 409 पद खाली थे.

कानून मंत्रालय ने कानून एवं कार्मिक मामलों से जुड़ी स्थायी समिति को बताया कि देश के सभी हाई कोर्ट को मिलाकर सिर्फ 73 महिला जज सेवा दे रही हैं. जो कि क्षमता का सिर्फ 10.89 फ़ीसदी है.

नौकरीपेशा लोगों में महिलाओं की कम संख्या को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है. ये आंकड़े और भी निराशाजनक हैं. इसको लेकर मंत्रालय ने भी अपनी चिंता जाहिर की है. महिलाओं और हाशिए पर मौजूद समुदायों की सीमित भागीदारी पर मंत्रालय ने हाई कोर्ट से इस समस्या पर विचार करने का अनुरोध किया है.

सरकार ने कहा, ‘‘उच्चतर न्यायपालिका में समाज के विभिन्न तबके का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह किया जा रहा है.’’

हालांकि, केंद्र ने ये साफ तौर पर कहा है कि हाई कोर्ट में आरक्षण के लिए अनुच्छेद 124 और 217 में संशोधन करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

साथ ही यह भी कहा गया है कि कमेटी को ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री/ राज्यपाल को दी गई छह महीने की समय सीमा न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज करने के लिए घटाई जा सकती है.

गौरतलब है कि जिस वक्त यह रिपोर्ट तैयार की गई थी उस समय देश में 24 हाई कोर्ट थे.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए अलग-अलग हाई कोर्ट हो जाने के बाद इस साल एक जनवरी से इनकी संख्या बढ़ कर 25 हो गई है.


Big News