पहली तिमाही में मांग में कमी से कंपनियों की कमाई में गिरावट
अर्थव्यवस्था में घटती मांग और गिरते निजी निवेश के चलते भारतीय कंपनियों के मुनाफे में मंदी रहने की संभावनाएं है. वित्तीय आंकाड़ों से पता चला है कि बीएसई में नामित 281 कंपनियों के कुल मुनाफे में पिछले साल के मुकाबले इस साल पहली तिमाही में गिरावट आई है.
कैपिटललाइन के आंकड़ों के मुताबिक बीएसई में नामित 281 कंपनियों का कुल मुनाफा पिछले साल जून तिमाई में 23.8 फीसदी के मुकाबले इस साल पहली तिमाही में 8.49 फीसदी रहा. हालांकि बीती मार्च तिमाही में 5.67 फीसदी के मुकाबले इसमें बढ़ोत्तरी देखने को मिली है.
लाइव मिंट की खबर के मुताबिक इस दौरान कुल बिक्री पिछली 13 तिमाहियों के सबसे निचले स्तर पर पंहुच कर 5.07 फीसदी रही. पिछले साल इसी तिमाही में कुल बिक्री 20 फीसदी रही थी, जबकि इस साल मार्च तिमाही में यह 10.27 फीसदी रही.
वहीं मार्च तिमाही की तुलना में संचालन लाभ मार्जिन में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है. जून तिमाही में यह 22.49 फीसदी रहा, जबकि इस साल मार्च तिमाही में यह 20.74 फीसदी था.
इन कंपनियों के डेटा में बैंक, वित्तीय सेवाएं, तेल और गैस कंपनियों के आंकड़े शामिल नहीं है क्योंकि ये दूसरे राजस्व मॉडल पर चलते हैं.
अप्रैल-जून में कच्चे तेल की कीमतों में 2.7 फीसदी तो वहीं एलएमई (लंदन मेटल एक्सचेंज) एल्युमीनियम में छह फीसदी की कमी रही जिसकी वजह से वस्तुओं के दाम घटे. ऐसे में कुछ हद तक विकास में गति बनी रही है.
नोमुरा के मुताबिक मार्च तिमाही में वस्तुओं के दाम में 60 आधार अंकों की और जून तिमाही में 20 आधार अंकों की कमी देखने को मिली. नोमुरा ने 9 जुलाई को अपनी एक रिपोर्ट में कहा, “स्टील और एल्युमीनियम के नए दामों के बाद, वस्तुओं के दाम और कम हो गए हैं. वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में प्रमुख कीमतों में मंदी रही जो फिलहाल नीचे जा रही हैं. जिसके कारण बैटरी कंपनियों के मार्जिन में सुधार हो सकता है.”
आईसीआईसीआई सिक्योरिटी लिमिटेड के शोध अध्यक्ष पंकज पांडे ने कहा, “वस्तुओं के दामों में कटौती से धातु क्षेत्र की कंपनियों को नुकसान हुआ है. जबकि धातु को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करने वाली कंपनियों का लाभ बढ़ा है.”
उन्होंने कहा, “इन्वेंट्री लॉस और वस्तुओं के दामों में कटौती के चलते धातु आधारित कंपनियों के लिए अगली तिमाही कुछ खास नहीं रहेगी. हालांकि सीमेंट पर यह नियम लागू नहीं होता.” जहां एक ओर केंद्रीय बजट के प्रस्ताव स्टॉक मार्केट में हो रही गिरावट के पीछे जिम्मेदार हो सकते है. वहीं विश्लेषकों का मानना है कि कमाई की गति को बनाए रखना अहम होगा.
दूसरी ओर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम मानसून की रफ्तार अब तक धीमी रही है. मानसून में अब तक सामान्य से 16 फीसदी कम बारिश हुई है. मौसम विज्ञान विभाग ने अगले एक हफ्ते में भारत के अधिकतर हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावनाएं जताई हैं.
सीएआरई रेटिंग ने कहा, “जून में मानसून की शुरुआत से अब तक छह हफ्तों में बारिश का स्तर परेशान करने वाला रहा है. हालांकि जून में कम हुई बारिश की भरपाई बीते दिनों में हुई है. लेकिन अब भी बारिश सामान्य से कम रही है. अनुमान है कि अगस्त में अच्छी बारिश देखने को मिलेगी.” विश्लेषकों का मानना है कि कम ब्याज दर और बजट की कुछ घोषणाओं के बाद जुलाई-सितंबर तिमाही में विकास में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है. उनका कहना है कि रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में कटौती से पूंजी की लागत में गिरावट देखने को मिलेगी है.