असम: बीजेपी-एजीपी सरकार में मतभेद बढ़े, कई नेताओं का इस्तीफा


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नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच असम में सत्तारूढ़ बीजेपी-एजीपी (असम गण परिषद) गठबंधन से कई बड़े नेता इस्तीफा दे रहे हैं.

राज्य संचालित असम पेट्रोकेमिकल लिमिटेड के अध्यक्ष और वरिष्ठ बीजेपी नेता जगदीश भुइयां ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अंग्रेजी अखाबर हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि ‘जब मैंने देखा कि संशोधित सीएए असम के लोगों के खिलाफ है तो मैंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया. अब मैं नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन करूंगा.’

इससे एक दिन पहले असम के जाने-माने कलाकार जतिन बोरा और रवि शर्मा ने भी बीजेपी से त्यागपत्र दे विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया.

बोरा ने कहा, ‘मैं जो भी हूं वो असम के लोगों की वजह से हूं. मैंने अपनी पार्टी और पद दोनों छोड़कर लोगों के साथ खड़े रहने का फैसला किया है.’

विधानसभा के स्पीकर हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने कहा कि ‘सरकार को बह्मपुत्र घाटी में ये नया कानून लागू करने पर एक बार फिर विचार करना चाहिए. स्थितियां आगे और खराब हो सकती हैं और असामाजिक तत्व इनका फायदा उठा सकते हैं. सीएबी समाज में विभिन्न समुदायों के बीच स्थिति को बिगाड़ देगा.’

असम गण परिषद के एक नेता ने बताया कि ‘सीएए के खिलाफ अधिकतर जिला स्तर से नेता अपना इस्तीफा दे रहे हैं. अवैध प्रवासियों के खिलाफ विरोध के मुद्दे पर सकल लेने वाली पार्टी सीएए पर शांत कैसे रह सकती है. इसलिए पार्टी के कई स्थानीय नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है.’

हालांकि बीजेपी इसे चिंताजनक स्थिति के तौर पर नहीं देख रही है.

बीजेपी की असम इकाई के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने कहा, ‘कुछ बाहरी लोग सीएबी के खिलाफ प्रदर्शनों का फायदा उठाकर हिंसा भड़का रहे हैं. एएएसयू और अन्य क्षेत्रीय समूह इस तरह की घटनाओं के लिए बिलकुल भी जिम्मेदार नहीं हैं. कांग्रेस उत्तरी असम में हिंसा भड़काने का काम कर रही है.’

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, ‘बीजेपी ने दिखा दिया है कि वो असम के खिलाफ है. एजीपी भी इसके पीछे उतनी ही जिम्मेदार है, असम के लोग इन्हें कभी माफ नहीं करेंगे. हम इस संघर्ष में लोगों के साथ हैं.’


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