मॉब लिंचिंग के हफ्तों बाद भी एफआईआर नहीं


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85 साल के जैनुल अंसारी की हत्या के मामले में अबतक एफआईआर नहीं हो पाई है.

बिहार के सीतामढ़ी जिले में तीन सप्ताह पहले हुई इस मॉब लिचिंग के मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

20 अक्टूबर को जैनुल अंसारी की लाश गोशाला चौक के पास मिली थी. दशहरा के एक दिन बाद दुर्गा की प्रतिमा के तोड़े जाने के बाद इस इलाके में तनाव बढ़ गया था.

अंग्रेजी दैनिक अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जैनुल अंसारी के परिजनों ने भीड़ पर हत्या का आरोप लगाया है. भीड़ ने उन्हें कथित तौर पर जिन्दा जला दिया था जब वह अपनी बहन से मिलकर लौट रहे थे.

अखबार के मुताबिक प्रशासन ने हत्या के बाद एहतियातन इंटरनेट बंद कर दिया था. जैनुल की लाश को पोस्टमार्टम के लिए मुजफ्फरपुर के एसकेएम कॉलेज और अस्पताल भेजा गया था. घटना के एक दिन बाद लाश का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.

सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विकास बर्मन मॉब लिंचिंग से इनकार नहीं करते हैं.

वो कहते हैं, “जैनुल अंसारी पर लौटते समय हमला हुआ होगा. हम पता लगा रहे हैं कि उन्हें कैसे जलाया गया. मामले में अलग से कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है. हमने दंगे का मामला दर्ज किया है, जिसमें शव मिलने के मामले में अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है.”

अखबार के मुताबिक, सीतामढ़ी पुलिस ने दंगे के आरोप में अबतक छह एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ 38 लोगों को गिरफ्तार किया है. लेकिन अबतक हत्या के मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है.

बर्मन कहते हैं, “अभी तक किसी व्यक्ति या समूह को इस मामले में दोषी नहीं पाया गया है.”

हत्या के दो दिन बाद दिल्ली में रह रहे जैनुल के दो बेटों ने वायरल वीडियो को देखकर अपने पिता की पहचान की थी.

जैनुल के बेटे मोहम्मद अशरफ कहते हैं, “उनका पूरा शरीर जल चुका था, आधे जले चेहरे से हम उनकी (पिता) पहचान कर पाए. हमारी बुआ शलीमा खातून ने भी कहा था कि मेरे पिता 20 अक्टुबर को दोपहर 12 बजे राजोपट्टी गांव से चले थे, ठीक इसी समय इलाके में हिंसा भड़की थी.”
मोहम्मद अशरफ आगे कहते हैं, “हमें टाऊन पुलिस स्टेशन से भी कोई जानकारी नहीं मिल पाई. 23 अक्टूबर को हमें पता चला कि सीतामढ़ी सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम होने वाला है. आखिर में हमें शव को मुजफ्फरपुर के एसकेएम कॉलेज और अस्पताल भेजने का पता चला.”

वो कहते हैं, “जिला प्रशासन ने शव को मुजफ्फरपुर में ही दफनाने की हिदायत के साथ दो बसों का इंतजाम किया था. प्रशासन को सांप्रदायिक हिंसा भड़कने की आशंका थी. हमने भी उनके आदेश को मान लिया.”

वो आगे कहते हैं “पुलिस अब कह रही है कि वे दोषियों का पता लगाने के लिए वीडियो की जांच कर रहे हैं. इससे पहले वे वीडियो क्लिप को सही नहीं मान रहे थे. हम दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी चाहते हैं. हमने किसी का नाम नहीं लिया है.”


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