फेस्टिव सीजन में भी 60 फीसदी से अधिक कंपनियों ने छोड़ी फायदे की उम्मीद
फेस्टिवल सीजन शुरू होने के बावजूद देश में मांग कमजोर रहने का अनुमान लगाया गया है, जिसकी वजह से कंपनियों की परेशानी बढ़ गई है.
वैश्विक स्तर पर वित्तीय बाजारों के लिए डेटा और बुनियादी ढांचे के बारे में जानकारी देने वाली संस्था रिफिनिटिव के आंकड़ों के मुताबिक 125 उद्यमों की ओर से जून की तिमाही के लिए जारी अनुमानों में 60 फीसदी से अधिक कंपनियों ने लाभ का जिक्र नहीं किया है.
भारत की सबसे बड़ी ऋणदाता और ऑटोमोबाइल कंपनियां मांग और खपत में घटी वृद्दि दर की वजह संकट में हैं.
इंडियन फेस्टिवल सीजन अक्टूबर से शुरू होकर साल के अंत तक रहता है. इस दौरान खासकर अक्टूबर महीने में दिपावली के मौके पर सबसे अधिक खरीददारी होती है.
जानकारों का मानना है कि दो से तीन महीनों में स्थिति में बदलाव की संभावना नहीं है और उपभोक्ता खरीदारी करने से बच रहे हैं.
अप्रैल महीने के बाद ऑटोमोबाईल की बिक्री में 17 से 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. आंकड़ों के मुताबिक जुलाई महीने में कार की बिक्री में 30 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स को जून में घाटा उठाना पड़ा है. जबकि मारुति सुजुकी की बिक्री में 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.
जनवरी से मार्च की तिमाही में पिछले चार साल में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर सबसे कम रही है.
अनियमित मॉनसून, बेरोजगारी की बढ़ी दर और बाजार में पैसे की कमी ने अनिश्चितता बढ़ा दी है. इसकी वजह से फेस्टिवल सीजन में भी बाजार में मांग कमजोर रहने का अनुमान है.
जून की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद एनएसईआई में 10 फीसदी की कमी आई है.