नए प्रोजेक्ट्स में निवेश पिछले पंद्रह सालों में सबसे कम
पांच जुलाई को बजट पेश होने जा रहा है. इससे ठीक पहले भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक निराशाजनक खबर आई है. सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकॉनमी के डेटा के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही में नये प्रोजेक्ट्स में होने वाला निवेश पिछले 15 सालों में सबसे कम रहा.
भारत की निजी और सरकारी दोनों तरह की कंपनियों ने वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही में 43,400 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्टों की घोषणा की. यह आंकड़ा इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही से 81 फीसदी और पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही के मुकाबले 87 प्रतिशत कम रहा.
हालांकि, सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकॉनमी द्वारा जारी किए गए ये आंकड़ें अंतिम नहीं है और एक लंबे अंतराल के बाद जारी किए गए हैं. इन आंकड़ों को संशोधित किया जा सकता है.
फिलहाल ये आंकड़ें भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश की खराब स्थिति प्रदर्शित कर रहे हैं और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की उस चिंता को सही साबित कर रहे हैं जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश के लगातार सिकुड़ने की बात कही गई है.
बताया जा रहा है कि निवेश में इस भारी कमी का कारण लोकसभा चुनावों के दौरान पैदा हुई अनिश्चितता और एक नए सत्तापक्ष का संक्रमण है. हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान इसी तिमाही में निवेश बढ़ा था. वहीं 2009 और 2004 में घटा था. लेकिन 2009 और 2014 के मुकाबले इस बार निवेश बहुत घटा है. इससे पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के हालात अच्छे नहीं हैं.