नीति आयोग ने ‘मंदी’ के लिए लगातार किए गए सुधारों को जिम्मेदार ठहराया


NITI Aayog blamed successive reforms for Slowdown

 

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने जीडीपी वृद्दि दर में आई कमी के लिए लगातार किए गए सुधारों को जिम्मेदार ठहराया है. अर्थव्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि जीएसटी, रेरा और आईबीसी जैसे सुधारों की वजह से अर्थव्यस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है.

नीति आयोग के सीईओ कांत ने कहा, “जीडीपी वृद्धि दर में कमी की एक बड़ी वजह लगातार किए गए रिफॉर्म(सुधार)- जीएसटी, आईबीसी, रेरा हैं. हमने कई सुधारों की शुरुआत कर दी है और मेरा मानना है कि सुधार के अगले चरण में तेल और गैस, खनन, कोयला जैसे क्षेत्रों को शामिल करना चाहिए. हमें कोयला खनन और रेलवे का जरूर व्यावसायीकरण करना चाहिए और यही भारत के विकास को आगे बढ़ाएंगे.”

उन्होंने दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग एनईएफ समिट में कहा, “सबसे पहले आपको उच्च स्तर की तरलता(बाजार में मुद्रा का प्रवाह) लानी होगी.”

उन्होंने कहा कि आप प्राइवेट सेक्टर के बिना पूंजी का निर्माण नहीं कर सकते हैं, आपको निजी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने की जरूरत है.

उन्होंने निजीकरण और विनिवेश पर जोर देते हुए कहा, “सरकार को सड़क जैसे कई क्षेत्रों से खुद को अलग करने और सरकारी संपत्तियों को ‘रिसाइकल’ करने की जरूरत है. हमने एयरपोर्ट के साथ ऐसा किया है. गैस ग्रिड, गैस पाइपलाइन, परिवहन को निजी क्षेत्रों के हाथों में होना चाहिए. नीति आयोग ने एक बड़े क्षेत्र का प्राइवेटाइजेशन करने की सलाह दी है. प्राइवेट सेक्टर के इन क्षेत्रों में आने के बाद पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा.”

उन्होंने कहा कि हमें मुख्य संरचनाओं में सुधारों को जारी रखना होगा.

कांत ने कहा कि सरकार भारत को इलेक्ट्रिक वाहन के हब के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है.

उन्होंने कहा कि हम मोबाइल क्रांति, फोटो वोल्टिक क्रांति और टेलिकॉम उपकरणों की क्रांति का फायदा नहीं ले सके लेकिन हम ई-वाहनों में ऐसा नहीं होने देंगे.

 


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