प्रियंका गांधी ने रोड शो कर जीता दिल
लखनऊ में प्रियंका गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ रोड शो किया. कांग्रेस की महासचिव बनने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा पहली बार लखनऊ गई थीं. उनके साथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर,राजीव शुक्ला, पीएल पुनिया और आरपीएन सिंह समेत कई नेता भी थे.
इस तस्वीर में प्रियंका गांधी अपने भाई राहुल गांधी और पार्टी के दूसरे नेताओं के साथ एक बस की छत पर हैं. वहां से वे सभी कार्यकर्ताओं का अभिवादन कर रहे हैं. अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा 11 फरवरी को राजधानी लखनऊ पहुंचीं.
प्रियंका ने रोड शो से पहले कांग्रेस के शक्ति ऐप के जरिए कहा, “मैं आप सब से मिलने कल लखनऊ आ रही हूं. मुझे उम्मीद है कि साथ मिलकर हम नई तरह की राजनीति शुरू करेंगे. एक ऐसी राजनीति जिसमें सब का भला होगा. सबसे कमजोर व्यक्ति की आवाज सुनी जाएगी.”
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रियंका गांधी कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान मिलने के बाद लखनऊ में थीं. इस चुनावी मौसम में प्रियंका गांधी के रोड शो ने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा भरी तो वहीं विपक्षी दलों में उनको मिले जनसमर्थन से बेचैनी भी फैली.
लोकसभा चुनाव तीन महीने पहले सक्रिय राजनीति में कांग्रेस की तरफ से प्रियंका की भूमिका एक नई बयार का संकेत है. इतना तो कयास लगाया ही जा सकता है कि प्रियंका की लोकप्रियता बीजेपी के सामने एक बड़ी चुनौती होगी. वो जनता में काफी प्रभावी हैं और ऐसा माना जा रहा कि इसका पूरा फायदा कांग्रेस को मिलेगा.
बरसों से कांग्रेस कार्यकर्ता प्रियंका गांधी को सक्रिय तौर पर किसी बड़ी जिम्मेदारी के रूप में देखना चाहते थे. इसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं ने देश भर में तमाम पोस्टर और नारे लगाए. उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि जनता उन्हें देखने को उमड़ पड़ी. इस दौरान कथित राफेल घोटाले को लेकर वर्तमान सरकार निशाने पर रही.
अपने चार दिनों के दौरे के दौरान प्रियंका न केवल चुनावी अभियान का शंखनाद करेंगी, बल्कि बड़े पैमाने पर कार्यकर्ताओं का मिजाज भी समझेंगी. प्रियंका के यहां पहुंचने से पहले कांग्रेस के राज्य मुख्यालय में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं.
प्रियंका की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह अवाम से बगैर किसी प्रोटोकॉल के मिलती हैं. एकदम बेहिचक. उनके और जनता के बीच संवाद में दूसरे नेताओं की तरह खाई नहीं होती है. यही वजह रही है कि सक्रिय राजनीति से दूर रहते हुए भी उनकी लोकप्रियता दूसरों में रश्क पैदा करती है.
प्रियंका, राहुल के रथ पर रास्ते में खड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने गुलाब और गेंदे के फूल बरसाए. रोड शो के मार्ग पर तमाम जगहों पर पंडाल और स्टेज लगाए गए थे.
जनता और कार्यकर्ताओं को प्रियंका गांधी के व्यक्तित्व में इंदिरा गांधी की छाप साफ दिखाई पड़ती है. यह बात सिर्फ यहीं तक नहीं रह जाती है, बल्कि मीडिया और विपक्षी दलों में भी उन्हें मजबूत, कद्दावर और काबिल शख्सियत के तौर पर देखा जाता है.
प्रियंका को पूर्वी उप्र का प्रभारी नियुक्त किए जाने के बाद राज्य की यह उनकी पहली यात्रा है.
साहित्य में गहरी दिलचस्पी रखने वाली प्रियंका गांधी राजीव और सोनिया गांधी की दूसरी संतान है. वो 12 जनवरी 1972 को नेहरू परिवार में पैदा हुईं थीं.