आरबीआई में कैश की कमी, लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए ले सकता है ऋण
भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि यह 63 दिनों तक 250 अरब रुपये की रिवर्स रेपो दर पर नीलामी रोकेगा.
इस तरह यह पहला ऐसा कदम होगा जिसके तहत एक लंबी अवधि में रिजर्व बैंक से कैश की निकासी नहीं की जाएगी. केंद्रीय बैंक इस समय लिक्विडिटी की कमी से जूझ रहा है. केंद्रीय बैंक ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वो आगे भी नीलामी रोकेगा.
ऐसी स्थिति में उन भारतीय बॉन्ड व्यापारियों को अपनी योजनाओं को बदलना पड़ेगा, जो यह सोच रहे थे कि रिजर्व बैंक उनके लिए कैश की आपूर्ति करता रहेगा.
मुंबई में आईसीसी सिक्यूरिटीस प्राइमरी डीलरशिप में फिक्स्ड इनकम ट्रेडिंग के प्रमुख नवीन सिंह ने कहा, “बाजार इसे अब आरबीआई की तरफ से ‘नो ओपन मार्किट ऑपरेशन्स’ के तौर पर देखेगा.”
आरबीआई ने पिछले वित्त वर्ष में तीन खरब रुपये का ऋण लिया था. इस साल मार्च के बाद से अब तक आरबीआई बॉन्ड खरीद पर 500 अरब रुपये खर्च कर चुका है. इसने ऋण लेकर लिक्विडिटी बढ़ाने की जगह फॉरेक्स स्वैप को भी इंट्रोड्यूस किया है.
असल में लगातार मंद पड़ती जा रही आर्थिक विकास दर और बढ़ते जा रहे बैंकिग संकट से निपटने के लिए अधिक लिक्विडिटी की जरूरत है.
इस वजह से अनुमान लगाया जा रहा था कि आरबीआई बैंको से ऋण लेगा और रिवर्स रेपो दर को कम कर देगा.