मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में शेयर बाजार ने गंवाए 12 लाख करोड़ रुपये
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती 50 दिन शेयर बाजार के लिए बहुत निराशाजनक साबित हुए हैं. निवेशकों को उम्मीद थी कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में शेयर बाजार की हालत सुधरेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है.
असल में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती 50 दिन में शेयर बाजार के निवेशकों को 12 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इस दौरान कारोबारी सेंटिमेंट भी काफी निराशाजनक रहा.
30 मई को नरेंद्र मोदी के दोबारा भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते वक्त बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केटगैप 156 लाख करोड़ रुपये से अधिक था. महज पचास दिनों में यह 7.5 फीसदी अर्थात 11.70 लाख करोड़ रुपये घटकर 144 लाख करोड़ रुपये हो गया.
मोदी सरकार के इस कार्यकाल में बीएसई के हर 10 में से 9 शेयर (2,664 में से 2,294) खतरे के निशान में काम कर रहे हैं. करीब 60 फीसदी शेयर 10 फीसदी या उससे भी नीचे हैं. जबकि एक तिहाई शेयर 20 फीसदी के नीचे काम कर रहे हैं.
अपने दूसरे कार्यकाल में सरकार ने इस बात का खास ख्याल रखा है कि वो अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से ना डिगे. हालांकि, इस बार के बजट में हुई कुछ घोषणाओं को लेकर बाजार ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. इसके अलावा आर्थिक विकास दर में कमी भी बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है.
आंकड़ों की मानें तो जुलाई में विदेशी निवेशकों ने इक्विटी बाजार से 7,712 करोड़ रुपये निकाले हैं. इन निवेशकों ने जून में 2,592 करोड़ रुपये और मई में 7,919 करोड़ रुपये का निवेश किया था. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती 50 दिन में सेंसेक्स चार फीसदी या 1,800 अंक गिरा है.
22 जुलाई को सेंसेक्स 400 अंक तक फिसला. बीएसई का प्रमुख सूचकांक 38,000 का स्तर बनाए रखने के लिए जूझ रहा है.