टैक्स चोरी से मुश्किल हो सकता है राजकोषीय घाटा लक्ष्य को हासिल करना


budget unlikely to increase tax exemption limit

 

टैक्स टारगेट के लक्ष्य को पूरा न कर पाना और भारत की धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था मोदी सरकार की नाकामयाबियों को तो दिखाती है लेकिन इसकी एक और मुख्य वजह कर की चोरी भी है.

कैग की रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी रिटर्न करने की संख्या में गिरावट आई है.

2017 में देशभर में लाए गए जीएसटी को व्यापक रूप से कर अनुपालन में सुधार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन कैग की रिपोर्ट के मुताबिक यह कामयाब होता नजर नहीं आ रहा है.

अर्थव्यवस्था में मंदी के साथ-साथ कई तरह की टैक्स चोरी के मामलों की वजह से राजस्व में भारी गिरावट देखी जा रही है. कुकीज से लेकर कारों तक सभी की मांग में गिरावट देखी जा रही है. उपभोगता क्षेत्र का भारत की जीडीपी में लगभग 60 प्रतिशत का योगदान है. लेकिन बैंकों के अर्थिक संकट के दौर से गुजरने की वजह से इस पर बहुत बुरा असर पड़ा है और इसकी वजह से वृद्धि पांच साल के निचले स्तर तक आ पहुंची है.

टैक्स कंसल्टेंसी और ऑडिटिंग फर्म प्राइस वाटर हाउस कूपर्स एलएलपी के अनुसार, “एंटी-इवेस्टिव टैक्स शासन में उपभोग कर लाने की उम्मीद थी, लेकिन फर्जी बिल, टैक्स चोरी और नकली चालान के कई मामले सामने आने की वजह से ऐसा नहीं हो पाया.

पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, “मैं इस तरह के सुधार और कर व्यवस्था के जल्द से जल्द स्थिर होने की उम्मीद नहीं कर सकता हूं.”

पिछले वित्त वर्ष में सरकार के कुल राजस्व कर में 1.7 लाख करोड़ रुपये की गिरावट देखी गई थी.

वहीं अर्थव्यवस्था को लेकर की गई एक और गलती फिर से जीडीपी का राजकोषीय घाटा लक्ष्य 3.3 प्रतिशत तक रखने में कामयाब नहीं हो पाएगी. साथ ही यह बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी कार्यक्रमों पर खर्च करने की सरकार की क्षमता को भी प्रभावित और सीमित करेगी.

उपभोक्ता दर को बढ़ाने के मकसद से जीएसटी दर को कम करने का फैसला लिया गया था लेकिन इसके बावजूद आर्थिक वृद्धि दर धीमी ही रही और मार्च के अंत में तिमाही समाप्त होने तक यह सिर्फ 5.8 प्रतिशत तक ही पहुंच पाई.


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