कॉरपोरेट जगत के लिए सबसे खराब रहे बीते पांच साल
Twitter
साल 2013 से 2018 की अवधि पिछले 25 सालों में कॉर्पोरेट इंडिया के लिए सबसे खराब पांच साल रहे. यह बात सेल्स ग्रोथ और टैक्स के बाद होने वाले लाभ दोनों पर लागू होती है. इन पांच साल में कर्मचारियों को मिलने वाला मेहनताना भी काफी कम रहा है. इनमें सरकारी और प्राइवेट कंपनियां शामिल हैं.
इकनॉमिक और बिजनेस डेटा पर नजर रखने वाली एजेंसी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) ने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 के खत्म होने तक बीते पांच साल का सेल्स रेवेन्यू औसतन छह फीसदी की दर से बढ़ा था. यह वृद्धि दर 1993-94 के बाद से किसी भी पांच साल की समय अवधि के लिए सबसे कम रही.
वित्त वर्ष 2002-03 और 2007-08 के बीच पांच वर्षों में कॉर्पोरेट बिक्री में 21.2% की औसत वार्षिक वृद्धि देखी गई, जो इस अवधि में सबसे अधिक है.
पिछले पांच साल की अवधि में सरकारी कंपनियों की सालाना औसत वृद्धि 2.6 फीसदी रही, जो सबसे कम है. इस अवधि में घरेलू प्राइवेट सेक्टर ने अपने सेल्स रेवेन्यू में सालाना 6.5 फीसदी की वृद्धि की. हालांकि विदेशी कंपनियों के लिए यह आंकड़ा 13.6 फीसदी था.
पिछले पांच साल में वित्त वर्ष 2017-18 तक लाभ का आंकड़ा गिरकर 4.7 फीसदी (टैक्स के बाद) रहा. यहां तक कि 2007-08 और 2012-13 के बीच की अवधि में शुरुआती सालों में वैश्विक आर्थिक मंदी से प्रभावित होने के बावजूद भी टैक्स के बाद मुनाफा हर साल औसतन 1.1 फीसदी की दर से बढ़ा था. ये आंकड़ें इस बात के संकेत हैं कि पिछले पांच साल की अवधि कॉर्पोरेट जगत के लिए कितनी खराब रही.
वहीं इस समयावधि के दौरान विदेशी प्राइवेट सेक्टर में 12.2 फीसदी की सालाना वृद्धि देखी गई. हालांकि सरकारी कंपनियों का प्रदर्शन सबसे खराब रहा.
पिछले साल कॉरपोरेट जगत के द्वारा भुगतान किए गए कर्मचारी मुआवजे में वार्षिक वृद्धि सबसे कम देखी गई.
वित्त वर्ष 1992-93 में सबसे कम 12.2 फीसदी की वार्षिक वृद्धि देखी गई. जबकि आर्थिक उदारीकरण के तुरंत बाद वित्त वर्ष 1992-93 से 1997-98 के बीच पांच साल के दौरान सबसे ज्यादा वृद्धि देखी गई. इस अवधि में मुआवजे में 18.4% की वृद्धि हुई.
सीएमआईई का विश्लेषण बताता है कि वित्त वर्ष 2017-2018 के अंत तक बिक्री राजस्व में औसत वार्षिक वृद्धि दर छह फीसदी रही. यह वित्त वर्ष 1993-94 के बाद किसी भी पांच साल से सबसे कम है.