घटती बिक्री और छंटनी से परेशान वाहन उद्योग ने की जीएसटी दर घटाने की मांग
वाहन उद्योग ने सरकार से वाहनों पर जीएसटी दर घटाने समेत क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन पैकेज देने की मांग की है. वाहन उद्योग से जुड़े दिग्गजों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक की और उनका ध्यान उद्योग की चुनौतियों की ओर आकर्षित किया. इसमें वाहन क्षेत्र में नौकरियों पर लटक रही तलवार भी शामिल हैं.
वाहन क्षेत्र में मांग और खपत में कमी के बीच महिन्द्रा एंड महिन्द्रा लिमिटेड(एम एंड एम) ने एक बयान जारी कर सरकार से वस्तु एवं सेवा कर में कमी की मांग की है. एम एंड एम ने अपने बयान में कहा है कि वह नौकरी छूटने के बड़े खतरे को देख रही है. बयान में कहा गया है कि गिरती कीमत की वजह से वह केवल कामचलाऊ लाभ में है.
बयान में कहा गया है कि यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि हर महीने बिक्री में कमी आ रही है. इससे नौकरी पर असर पड़ रहा है.
वाहन क्षेत्र में केवल डीलरशिप में पिछले तीन महीनों में करीब दो लाख लोगों को नौकरी से निकाला गया है. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डिलर्स एसोसिएशन(फाडा) ने आशंका जताई है कि यदि मंदी का यही दौर जारी रहा तो आने वाले समय में कुछ और शो रूम को बंद करना पड़ सकता है.
वित्त मंत्री से मिलने वालों में मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर सी भार्गव , महिंद्रा एंड महिंद्रा के अध्यक्ष (वाहन क्षेत्र) और सियाम के अध्यक्ष राजन वढेरा समेत कलपुर्जे क्षेत्र के संगठन एसीएमए और डीलरों के संगठन एफएडीए के प्रतिनिधि शामिल थे.
उन्होंने कहा कि मांग में सुधार के लिए वाहनों पर जीएसटी को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की जरूरत है.
वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम के अध्यक्ष राजन वढेरा ने कहा, ” हां , हमने वाहन क्षेत्र के लिए कुछ रियायतों की मांग की है और वह इस पर विचार करेंगे. मुझे उम्मीद है कि वाहन क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन पैकेज जल्द आएगा.”
उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग से जुड़े लोगों से मांग में गिरावट की वजह और इस दिक्कत के समाधान के बारे में जानना चाहती है.
वढेरा ने कहा कि बैठक के दौरान वाहन उद्योग ने उन कारकों के बारे में विस्तार से बताया , जिनकी वजह से मांग प्रभावित हुई है. इनमें सस्ते कर्ज की उपलब्धता से जुड़ी दिक्कत, वाहनों के अधिग्रहण की बढ़ती लागत और वाणिज्यिक वाहनों की लोड क्षमता में बदलाव शामिल हैं.
वित्त सचिव राजीव कुमार ने इस बैठक को ‘केवल परामर्श प्रक्रिया’ करार दिया है.
उन्होंने कहा , “हमने उनकी बात सुनी है. हम वाहन उद्योग की मांगों को संकलित कर रहे हैं और हम इस पर गौर करेंगे.”
भारी उद्योग मंत्री अरविंद सावंत ने कहा कि सरकार ने वाहन क्षेत्र की दिक्कतों को सुना है और भरोसा दिया है कि हम उनकी चिंताओं पर गौर करेंगे.
सियाम के अध्यक्ष ने कहा , ” वाहन उद्योग ने दोहराया कि वाहन पंजीकरण शुल्क में प्रस्तावित वृद्धि नहीं की जानी चाहिए क्योंकि क्षेत्र पहले से कमजोर मांग की समस्या से जूझ रहा है.
इसके अलावा , सरकार को वाहन उद्योग में सुस्ती के बाद क्षेत्र में नौकरियों कम होने की समस्या से भी अवगत कराया गया है.
जुलाई महीने में एम एण्ड एम की बिक्री में 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इसी महीने में ह्युडई मोटर्स इंडिया की बिक्री में 3.8 फीसदी की कमी दर्ज की गई. होण्डा कार इंडिया 48.67 फीसदी कम बिक पाई. इसके साथ ही दो पहिया वाहन निर्माता कंपनियां भी मुश्किलों का सामना कर रही हैं.
मारुति सुजुकी इंडिया ने वाहन उद्योग में जारी सुस्ती के मद्देनजर जुलाई महीने में उत्पादन में 25.15 प्रतिशत की कटौती की है. यह लगातार छठवां महीना है जब कंपनी ने उत्पादन घटाया है.
मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने बंबई शेयर बाजार को बताया कि उसने जुलाई 2019 में 1,33,625 वाहनों का उत्पादन किया है। एक साल पहले इसी महीने में कंपनी ने 1,78,533 इकाइयों का उत्पादन किया था.