ट्रंप ने भारत और चीन पर ‘विकासशील देश’ के दर्जे का गलत लाभ उठाने का लगाया आरोप


Trump terminates preferential trade status for India under GSP

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारत और चीन जैसे बड़े देशों के विकासशील दर्जे को लेकर सवाल उठाया है. ट्रंप ने अपने डब्ल्यूटीओ प्रतिनिधि से कहा है कि वो इन देशों द्वारा डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत विकासशील के दर्जे का लाभ उठाने के विरुद्ध जरूरी कार्रवाई करें.

ट्रंप ने अपने ट्वीट में कहा, “डब्ल्यूटीओ बेकार हो जाता है जब दुनिया के सबसे अमीर देश डब्ल्यूटीओ के नियमों से बचने और विशेष प्रावधान पाने के लिए खुद के विकासशील होने का दावा करते हैं. अब ये और नहीं होगा. आज मैंने अपने व्यापार प्रतिनिधि से इस पर कार्रवाई करने को कहा है ताकि ये देश अमेरिका के खर्चे पर सिस्टम के साथ धोखेबाजी ना कर सकें.”

अमेरिकी व्यापार मंत्री रॉबर्ट लाइटहाइजर ने ट्रंप के इस बयान का जवाब देते हुए एक टिप्पणी जारी की. उन्होंने कहा, “लंबे समय से धनी देश डब्ल्यूटीओ के विशेष नियमों का फायदा उठाकर इसका दुरुपयोग करते रहे हैं. इसमें अमेरिका जो कि नियमों के मुताबिक चलता है गलत तरीके से नुकसान उठाता है और यहां बराबरी का व्यवहार नहीं होता. मैं राष्ट्रपति के इस एक समान व्यवहार की मांग के लिए उनके नेतृत्व का स्वागत करता हूं. मैं कोशिश करूंगा कि राष्ट्रपति के निर्देशों को लागू किया जा सके.”

अभी तक ये साफ नहीं हो सका है कि अमेरिका अपनी इन मांगो को मनवाने के लिए किस तरह के कदम उठाएगा. डब्ल्यूटीओ में सभी फैसले सहमति आधारित होते हैं और विकासशील देश ऐसे किसी कदम का पुरजोर विरोध करेंगे. हालांकि अमेरिका इसके शीर्ष न्यायिक निकाय में जजों की नियुक्ति ना कर इसे अपंग कर सकता है.

इससे पहले इसी साल फरवरी में भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और वेनेजुएला ने एक पत्र देकर डब्ल्यूटीओ से कहा था कि इन देशों का विकासशील दर्जा काफी पुराना है और इससे संस्था के उद्देश्यों को पूरा करने में मदद मिलती है.

इस पत्र में इन देशों ने विकासशील देशों के दर्जे के लिए मौजूद कारणों का भी उल्लेख किया था. इसमें इन देशों की जीडीपी, गरीबी का स्तर, कुपोषण, उत्पादन और रोजगार को वजह बताया गया था.

अमेरिका इससे पहले भी डब्ल्यूटीओ में इस मुद्दे पर प्रस्ताव ला चुका है. इसमें कहा गया था कि चीन और भारत जैसे देशों ने विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है.

उसने कहा था कि ऐसे देश जो कि जी-20 संगठन के सदस्य हैं और इसी तरह विश्व बैंक ने जिन्हें उच्च आय वाला देश घोषित कर रखा है. जिनकी विश्व व्यापार में 0.5 फीसदी हिस्सेदारी है उन्हें व्यापार समझौतों में विशेष लाभ नहीं दिया जाना चाहिए.


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