भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच अटका ई-कॉमर्स और डेटा सुरक्षा संबंधित कानून


trump to join modi in houstan to address indo-americans

 

अमेरिका के साथ संवेदनशील व्यापार वार्ता चलने की वजह से ई-कॉमर्स नीति और डेटा सुरक्षा कानून बनाने संबंधित प्रस्तावित मसौदे को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है. अमेरिकी कंपनियों ने इन दोनों प्रस्तावित कानून का विरोध किया है.

इ-कॉमर्स नीति और डेटा सुरक्षा संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों ने इस बारे में बताया.

दक्षिण और मध्य एशिया के सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, क्रिस्टोफर विल्सन और भारत के अतिरिक्त वाणिज्य सचिव, संजय चड्ढा के बीच 11-12 जुलाई को दिल्ली में बैठक हुई थी. इससे पहले दोनों देशों के प्रमुखों ने जापान के ओसाका में हुए जी-20 समिट के बीच द्विपक्षीय संबंध को बेहतर करने के लिए बातचीत की थी.

नई दिल्ली और वाशिंगटन में हुई इन दोनों मुलाकात के बाद मामले के जानकारों का कहना है कि इससे कुछ अतिरिक्त हासिल नहीं हुआ है, लेकिन फिर भी दोनों देशों ने एक दूसरे के साथ काम करने को लेकर इच्छा जताई है.

बातचीत में जिस मुद्दे पर सुई अटकी हुई है वो आयात शुल्क एवं बैरियर्स और दोनों प्रस्तावित कानून हैं. जिसके बारे में अधिकारियों का कहना है कि उसमें कुछ बदलाव किया जा सकता है. यह बदलाव घरेलू बाजार और विदेशी निवेश दोनों के बीच संतुलन बनाकर  किया जाएगा.

एक अधिकारी ने कहा, “व्यापक ई-कॉमर्स नीति के लिए डेटा सुरक्षा नीति बहुत महत्वपूर्ण है. कई अमेरिकी कंपनियों के लिए डेटा उनके संचालन का केन्द्र है. इसलिए वे डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध का विरोध करते हैं. जबकि डेटा संबंधी कानून के मसौदे का मकसद देश हित में डेटा लोकलाइजेशन और क्लासिफायड डेटा तक पहुंच पाना है.”

ई-कॉमर्स नीति का प्रशासनिक मंत्रालय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आता है. निजी डेटा प्रोटेक्शन बिल (2018), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आता है.

अधिकारियों ने कहा, “ई-कॉमर्स नीति के मसौदे का सरकार ने अनावरण नहीं किया है क्योंकि सरकार देश के लगभग 7 करोड़ व्यापारियों को निराश करना नहीं चाहती है. जो कि बीजेपी के लिए एक मजबूत पक्ष हैं. हालांकि दोनों नीतियों से संबंधित ड्राफ्ट आम चुनाव से पहले ही तैयार हो चुका था.”

26 जुलाई को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने राज्यसभा में कहा था, “नेशनल ई-कॉमर्स नीति का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और पब्लिक डोमेन में रख दिया गया है. अलग-अलग हितधारकों की टिप्पणी, जिसमें कंपनी, उद्योग, थिंक टैंक, विदेशी सरकारें शामिल हैं, हमें मिल चुकी है. हमने ई-कॉमर्स संबंधित मामले पर विचार-विमर्श करने के लिए अलग-अलग हितधारकों के साथ बैठक की है. इसके अलावा ई-कॉमर्स फर्म, किराना स्टोर और खुद्रा विक्रेताओं के साथ भी इस मामले में बातचीत की गई है.”

वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, “ड्राफ्ट पॉलिसी में ई-कॉमर्स से संबंधित छह मुख्य मुद्दों पर गौर किया गया है. इसमें वर्चुअल मार्केटप्लेस, नियंत्रण संबंधी मुद्दे, आधारभूत ढ़ांचे का विकास, डेटा, घरेलू डिजिटल अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करना और ई-कॉमर्स के माध्यम से निर्यात को बढ़ावा देना शामिल है.”

अधिकारी ने कहा, “ई-कॉमर्स नीति निजी डेटा सुरक्षा नीति पर निर्भर करता है. इसके तहत संवेदनशील डेटा को विदेशी सर्वर पर जाने से रोका जाएगा. साथ ही उपभोगताओं की निजी जानकारी की भी सुरक्षा की जाएगी.”

विदेश सचिव विजय गोखले ने हाल में ही डेटा के बारे में बताया था कि “डेटा देश की संपत्ति है.” उन्होंने इस मुद्दे पर अमेरिका और अन्य हितधारकों के साथ अतिरिक्त बातचीत करने की इच्छा जताई थी. उनका कहना था कि इससे डेटा के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखकर घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा.

अधिकारी ने कहा, “व्यापक ई-कॉमर्स नीति होने से डेटा के इस्तेमाल को रेगुलेट किया जा सकेगा. यह एक डिजिटल अर्थव्यवस्था में किसी भी कंपनी के कामयाब होने के लिए सबसे जरूरी है. उपभोगताओं के हितों की सुरक्षा करना, घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देना, घरेलू और वैश्विक कंपनियों के गलत इस्तेमाल पर नजर रखना और ऑनलाइन कॉमर्स के लिए कानूनी फ्रेमवर्क मुहैया करना नीतियों के कुछ अन्य अहम बिंदू हैं.”

घरेलू विक्रेताओं के हितों का ध्यान रखते हुए सरकार ने हाल में विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों के उत्पाद बेचने पर रोक लगा दी थी.  सरकार के इस कदम का 7 करोड़ घरेलू व्यापारियों और छोटे दुकानदारों ने स्वागत किया था. लेकिन सरकार के इस कदम को विदेशी निवेशकों और मल्टीनेशनल कंपनियों के आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.

इस मुद्दे पर अमेरिका का मानना है कि भारत को उसके साथ नर्म रवैया रखना चाहिए. खासतौर पर ट्रंप प्रशासन और उनके अमेरिका फर्स्ट नीति के संबंध में भारत सख्त नहीं हो सकता है. इसमें बराबर लेन-देन की नीति अपनाई जा सकती है. इसमें चिकित्सा उपकरण  जैसे स्टेंट और दुग्ध उत्पादों का आयात-निर्यात शामिल है.

इस मुद्दे पर वॉशिंगटन के एक जानकार का कहना है कि, “चिकित्सा उपकरणों के दामों को नियंत्रण में रखने की भारत की जरूरत को हम समझ सकते हैं. लेकिन हमारी कंपनियां भी मुनाफा कमाना चाहती हैं. दुग्ध उत्पादों के मसले पर हमें डुअल सर्टिफिकेट लेने को कहा गया है.”

28 जून को जापान के ओसाका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुलाकात से पहले और अमेरिकी व्यापार अधिकारियों के भारत दौरे के बाद ट्रंप ने ट्वीट कर भारत का अमेरिकी उत्पादों पर  लगाए गए सीमा शुल्क की आलोचना की थी.

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध को बेहतर बनाने की इच्छा जाहिर कर चुका है. रणनीतिक मामले, सेना और आतंकवाद पर अमेरिका भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है.


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