सेना में समलैंगिकता की इजाजत नहीं: सेना प्रमुख
सुप्रीम कोर्ट ने भले ही समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया हो, लेकिन कई मोर्चों पर इस विचार को विरोधाभासी बयानों का सामना करना पड़ रहा है. सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा है कि सेना में समलैंगिकता की इजाजत नहीं दी जाएगी.
अपनी सालाना प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “हम इसकी (समलैंगिकता) की इजाजत सेना में नहीं देंगे.” सेना प्रमुख ने कहा कि सेना में समलैंगिकता के लिए नियम पहले से मौजूद हैं.
उन्होंने कहा, “हम देश के कानून से ऊपर नहीं हैं, लेकिन जब आप सेना में शामिल होते हैं तो आपको कुछ विशेषाधिकार मिलते हैं जो आमतौर पर उपलब्ध नहीं होते, हमारे लिए कुछ चीजें बाकियों से अलग होती हैं.”
इससे पहले बीते सितंबर महीने में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधानिक पीठ ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था. भारतीय दंड संहिता की धारा 377 अप्राकृतिक संबंधों को गैरकानूनी करार देती थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने समानता के अधिकारों के खिलाफ बताया था.
जरनल रावत से जब व्यभिचार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “सेना बहुत रूढिवादी है. हम इसे सेना को दूषित नहीं करने देंगे.”
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. ये फैसला देते समय कोर्ट ने कहा था कि व्यभिचार विरोधी कानून असंवैधानिक है. कोर्ट ने ये भी कहा था कि यह कानून स्त्री के स्वतंत्र आस्तित्व को ही नकारता है और उन्हें पुरुषों की संपत्ति की तरह से देखता है.