नागेश्वर राव नियुक्ति याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार


we are not a trial court can not assume jurisdiction for every flare up in country

 

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के तत्कालीन अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने पारदर्शिता के मामले में याचिकाकर्ता से अलग याचिका दाखिल करने को कहा है.

जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस विनीत सरन की एक बेंच ने कहा कि एक पूर्णकालिक सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के बाद अब किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.

नियुक्ति के खिलाफ याचिका एनजीओ कॉमन कॉज और आरटीआई कार्यकर्ता अजंलि भारद्वाज ने दायर की थी. याचिका में मांग की गई है कि इस नियुक्ति के लिए हाई पॉवर कमेटी की मंजूरी नहीं ली गई जो कि डीएसपीई एक्ट का उल्लंघन है. ऐसे में राव की नियुक्ति रद्द होनी चाहिए.

इसके साथ-साथ याचिका में कहा गया था कि 23 अक्टूबर को नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक नियुक्त किए जाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट 8 जनवरी को रद्द कर चुका है, इसके बावजूद सरकार ने मनमाने और गैर कानूनी तरीके से राव को फिर से अंतरिम निदेशक बना दिया.

जबकि मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि सीबीआई निदेशक को उचित तरीके से नियुक्त किया गया था. जिसपर कॉमन कॉज की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने कहा था कि याचिका में सीबीआई निदेशक की भविष्य की नियुक्ति के लिए पारदर्शिता की बात कही गई थी.

भूषण ने कहा था कि नीति और नियुक्ति के मापदंड की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए. मामले की सुनवाई के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरटीआई कानून में चयन प्रक्रिया के प्रावधान है.

कोर्ट ने यह भी कहा था कि उन्हें इसके लिए एक आरटीआई आवेदन दायर करना चाहिए और यदि कोई सूचना देने से इनकार करता है, तो वर अपील कर सकते हैं. इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया था कि उन्होंने उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया के विवरण के बारे में एक आरटीआई दायर की है, लेकिन अभी तक सरकार ने मामले में कोई जवाब नहीं दिया है.


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