अयोध्या भूमि विवाद: 10 जनवरी को पांच सदस्यीय संविधान पीठ करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में भूमि के मालिकाना हक संबंधी विवाद की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ गठित की है. ये पीठ दस जनवरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करेगी.
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली इस पांच सदस्यीय संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति उदय यू ललित और न्यायमूर्ति डी वाई चन्द्रचूड़ शामिल हैं. ये जानकारी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर दी गई है.
वेबसाइट पर दिए गए नोटिस में कहा गया है, “अयोध्या भूमि विवाद में दायर याचिकाएं 10 जनवरी, 2019 को सुबह साढ़े दस बजे मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होंगी.”
बीते साल 29 अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने इस मामले को जनवरी के पहले हफ्ते उचित पीठ के समक्ष रखने की बात कही थी. इसके बाद इस मामले पर जल्द सुनवाई के लिए एक याचिका भी दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था.
अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से संबंधित 2.77 एकड़ भूमि के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अदालत में 14 अपीलें दायर की गई हैं.
इससे पहले 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2:1 के बहुमत से इस मामले में फैसला सुनाया था. उच्च न्यायालय ने इस फैसले में विवादित भूमि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला जन्म भूमि के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था.
इस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर फैसला देते हुए शीर्ष अदालत ने मई 2011 में उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी थी. साथ ही विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश भी जारी किया था.