आदिवासियों को बेदखल करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने 10 लाख से ज्यादा वनवासियों और आदिवासियों को बेदखल करने के आदेश पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने ये आदेश केंद्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है.
जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच ने संबंधित राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे वनवासियों के दावे खारिज करने के लिए अपनायी गई प्रक्रिया के विवरण के साथ हलफनामे दाखिल करें.
बेंच ने सुनवाई के बाद कहा, ‘‘हम अपने 13 फरवरी के आदेश पर रोक लगा रहे हैं.’’ बेंच ने कहा कि वनवासियों को बेदखल करने के लिए उठाए गए तमाम कदमों के विवरण के साथ राज्यों के मुख्य सचिवों को हलफनामे दाखिल करने होंगे.
केंद्र ने 13 फरवरी के आदेश में सुधार का अनुरोध करते हुए कोर्ट से कहा कि अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) कानून, 2016 लाभ देने संबंधी कानून है. केंद्र ने कहा, बेहद गरीब और निरक्षर लोगों, जिन्हें अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है, की मदद के लिए इसमें उदारता अपनाई जानी चाहिए.
बेंच इस मामले में अगली सुनवाई 30 जुलाई को करेगी.
आदिवासी अधिकारों को नजरअंदाज करने के लिए आलोचनाओं का सामना कर रही केंद्र सरकार ने 27 फरवरी को कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के लिए याचिका दाखिल की थी.
केंद्र की ओर से याचिका में कहा गया था कि आदेश के बाद लाखों की संख्या में आदिवासी बेघर हो जाएंगे. केंद्र का कहना है कि अलग-अलग राज्यों की ओर से जंगल की जमीन पर आदिवासी समूहों के दावे खारिज करते समय कानून का उल्लंघन किया गया है.
13 फरवरी को आए कोर्ट के आदेश के बाद 19 राज्यों के करीब 10 लाख से ज्यादा आदिवासियों और जंगल में रहने वाले समुदायों का जीवन संकट में आ गया था. कोर्ट ने राज्य सरकारों को 27 जुलाई तक आदिवासी समूहों से जंगल खाली कराने का आदेश दिया था.