आम बजट के बारे में जानिए ये पांच रोचक तथ्य


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बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए सरकार अपने नए कार्यकाल का पहला बजट पेश करने जा रही है. ये पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बनी निर्मला सीतारमण का पहला बजट होगा. समग्र तौर पर ये देश का 89वां संघीय बजट बनने जा रहा है.

अंग्रेजी समाचार पत्र मिंट ने बजट के बारे में कुछ रोचक तथ्य प्रकाशित किए हैं. हम उन्हीं तथ्यों को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं.

भारत का पहला संघीय बजट अंतरिम बजट था. इसकी अवधि 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक थी. मतलब कि ये साढ़े सात महीने के लिए बनाया गया था. हालांकि पहले, बजट पूरे साल के लिए तैयार किया गया था, लेकिन भारत-पाकिस्तान बंटवारे के चलते उसे रोकना पड़ा था.

देश का पहला बजट तब के वित्त मंत्री रहे आरके शानमुखम शेट्टी ने पेश किया था.

सबसे बड़े और छोटे बजट भाषण

अगर शब्दों के आधार पर देखें तो सबसे बड़ा भाषण मनमोहन सिंह के द्वारा दिया गया था. 1991 में दिए गए इस बजट भाषण में कुल 18,177 शब्द थे. जबकि दूसरा सबसे बड़ा भाषण पिछली सरकार में वित्त मंत्री रहे अरुण जेटली ने दिया था.

जब समय के आधार पर लंबे भाषण की बात की जाती है तो सबसे ऊपर जसवंत सिंह का नाम आता है. 2003 में दिए गए इस बजट भाषण में कुल दो घंटे 13 मिनट का समय लिया गया था.

इसी तरह सबसे छोटा भाषण एचएम पटेल ने 1977 में पेश किए गए अंतरिम बजट में दिया था. इसमें कुल जमा 800 शब्द ही थे.

मोरारजी देसाई ने अब तक सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का श्रेय हासिल किया है. उन्होंने कुल 10 बार बजट पेश किया. दूसरे नंबर पर यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम हैं, इन्होंने नौ बार बजट पेश किए है.

जब परंपराएं टूटी

साल 1999 से पहले बजट शाम को पांच बजे पेश किया जाता था. ये परंपरा तब टूटी जब यशवंत सिंह ने अपनी सरकार का बजट सुबह 11 बजे पेश किया. इसके अलावा अरुण जेटली ने भी 2017-18 का बजट एक फरवरी को पेश कर परंपरा तोड़ी थी.

अभूतपूर्व प्रयास

टीटी कृष्णामचारी ने 1964-65 के लिए पेश किए बजट में पहली बार छिपी हुई आय को सामने लाने का प्रयास किया था. उन्होंने ही सबसे पहले 1965-66 के बजट में काले धन पर प्रहार की कोशिश की थी. इस बजट में वे स्वैच्छिक आय प्रकटीकरण योजना(वीडीआईएस) लेकर आए थे.

सबसे चर्चित वीडीआईएस योजना पी चिदंबरम 1997-98 के बजट में लेकर आए थे. इस योजना के तहत आय का खुलासा करने वालों को ब्याज और जुर्माने में छूट दी गई थी.

मनमोहन सिंह के 1991 वाले बजट में अर्थव्यवस्था की संरचना में व्यापक परिवर्तन किए गए थे. इस दौरान अर्थव्यवस्था को वैश्विक प्रतियोगिता के लिए खोल दिया गया था.

शख्सियत और उनके बजट

जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ऐसी शख्सियतों में शामिल हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए संघीय बजट पेश किया. इंदिरा गांधी बजट पेश करने वाली पहली महिला थीं. लेकिन वे पूर्णकालिक वित्त मंत्री नहीं थी. उनके पास वित्त मंत्रालय का प्रभार था.

आर वेंकटरमन और प्रणब मुखर्जी दो ऐसे नाम हैं जो पहले वित्त मंत्री रहे और बाद में देश के राष्ट्रपति बने. इसके अलावा सीडी देशमुख रिजर्व बैंक के पहले ऐसे गवर्नर थे जो बाद में देश के वित्त मंत्री बने.


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