सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए CAA पर बीजेपी ने रखा पक्ष, विपक्ष ने उठाए सवाल


bjp and opposition parties launched social media campaign to reach out to people on caa issue

 

दिल्ली के रामलीला मैदान में कल प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ना तो उनकी सरकार ने, ना ही कैबिनेट या संसद ने कभी एनआरसी पर चर्चा की है. प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि एनआरसी के बारे में झूठ फैलाया जा रहा है. प्रधानमंत्री ने भले ही ये बयान इस मुद्दे पर लोगों में सरकार का पक्ष स्पष्ट करने के लिए रखा हो पर इसके बाद लोगों में दुविधा बढ़ गई है और पार्टी विपक्षी पार्टियों के सवालों के घेरे में है. वजह है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस और संसद में गृह मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह देश भर में एनआरसी लागू करने की बात कह चुके हैं.

सीएए और एनआरसी के खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी है और अब तक कुल 25 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. सरकार का कहना कि लोगों में भ्रम है जिसे विपक्षी पार्टियां हवा दे रही हैं. वहीं आम जनता के कई सवाल ऐसे है जिनका केंद्र की ओर से फिलहाल कोई जवाब आता नहीं दिख रहा है, ना ही पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों या जन प्रतिनिधियों से चर्चा की पहल होती हुई दिख रही है.

इस सब के बीच बीजेपी ने सोशल मीडिया जरिए सीएए पर कैंपेन लॉन्च कर दिया है, जो मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करने की पहल है.

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने एएनआई को बताया कि सीएए और एनआरसी पर जागरूकता के लिए पार्टी रोचक वीडियो, मुस्लिम पात्रों पर केंद्रित कार्टून्स और ग्राफिक्स की मदद से लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेगी.

बीजेपी ने कल देर रात अपने ट्विटर अकाउंट से एक कार्टून फिल्म अपलोड की जिसमें दो लोग एक दूसरे से इस विषय पर बात करते सुने जा सकते हैं. बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा आज पश्चिम बंगाल में सीएए के समर्थन में जन सभाओं में हिस्सा लेंगे और मार्च निकालेंगे.

राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीएए और एनआरसी के विरोध में सड़कों पर उतर चुकीं हैं. इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी पार्टी प्रमुख और अन्य नेता जमकर विरोध कर रहे हैं. पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट और अन्य नेताओं ने #CITIZEN UNITED INDIA नाम से डीपी लगाई है. साथ ही वो से लगातार ट्वीट कर रहे हैं.

कांग्रेस अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से MYTHBUSTER सीरीज चला रही है जहां वो एनआरसी और सीएए पर लोगों के सवालों के जवाब देने की कोशिश कर रही है और केंद्र की इस योजना में छिपी खामियों को सामने लाने की कोशिश कर रही है.


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