जीएसटी की सबसे बड़ी समीक्षा शुरू, स्लैब और रेट में बदलाव की संभावना


govt did not examine gst system properly before rollout said cag

 

कर संग्रह में गिरावट के बीच सरकार ने जीएसटी की समीक्षा शुरू करने का आदेश दे दिया है. इसे दो साल पहले लागू हुए जीएसटी की सबसे बड़ी समीक्षा के तौर पर इसे देखा जा रहा है.

ये कार्य राज्य और केंद्र की 12 सदस्यीय अधिकारियों की कमिटी को सौंपा गया है. टैक्स चोरी रोकने और संग्रह में इजाफे के लिए सरकार ने ये समीक्षा शुरू की है.

बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक सरकार जीएसटी मुक्त सेवा और वस्तुओं को इसके दायरे में लाने और सबसे निचले टैक्स स्लैब पर जीएसटी बढ़ाने पर विचार कर रही है.

सितंबर महीने में जीएसटी संग्रह 19 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंचकर 91,916 करोड़ रुपये रहा. जबकि सरकार का मासिक जीएसटी संग्रह लक्ष्य एक लाख 18 हजार करोड़ रुपये है.

पीएमओ राज्य के प्रमुख सचिवों को संग्रह बढ़ाने के संबंध में सुझाव दे सकता है. उम्मीद की जा रही है कि कमिटी ढांचागत परिवर्तन, स्वैच्छिक अनुपालन में सुधार (ऐसे नियम बनाने पर भी जोर होगा कि लोग स्वेच्छा से ही जीएसटी के दायरे में जुड़ना चाहें), समग्र अनुपालन निगरानी को बढ़ावा देना आदि के संबंध में सुझाव दे सकती है.

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अब जीएसटी संग्रह में कमी सरकार के लिए हो सकती है अगली बड़ी चुनौती

रेस्तरां जैसे क्षेत्रों के जीएसटी से बचने और अन्य लीकेज को रोकने पर भी कमिटी विचार करेगी. जीएसटी समीक्षा कमिटी की ओर से राज्य सरकारों से कुछ उत्पादों को जीएसटी स्लैब में लाने पर विचार करने को कहा जा सकता है.

फिलहाल जीएसटी संग्रह के विभिन्न क्षेत्रों में परेशानी बनी हुई है. सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था, ऑटो क्षेत्र में सुस्ती और बाढ़ को संग्रह में कमी के पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है. इसके अलावा अधिकारियों का कहना है कि राज्यों के स्तर पर व्यवस्था को लागू करने में प्रतिबद्धता की कमी भी एक वजह है.

केंद्र ने पहले ही राज्यों को भरोसा दिलाया है कि अगर संग्रह सालाना 14 फीसदी से कम रहता है तो उन्हें मुआवजा दिया जाएगा.

हाल ही में विपक्षी पार्टियों द्वारा शासित राज्यों ने जीएसटी को लेकर केंद्र पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा कि कर संग्रह में गिरावट के पीछे सुस्त अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि जीएसटी व्यवस्था की गलत संरचना जिम्मेदार है. इसके अलावा कई राज्यों ने टैक्स में कटौती को भी संग्रह में कमी की वजह बताया है.

हालांकि केंद्र ने इन आरोपों को ये कहते हुए खारिज कर दिया कि जीएसटी कौंसिल द्वारा लिया गया प्रत्येक फैसला राज्यों के प्रतिनिधियों की सहमति से लिया गया.


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