इंसेफेलाइटिस से हो रही बच्चों की मौत पर जल्द जवाब दे सरकार: सुप्रीम कोर्ट


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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और बिहार सरकार से इंसेफेलाइटिस की वजह से हो रही मौत पर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि उन्होंने इससे बचाव के लिए क्या कदम उठाए हैं?

जस्टिस संजीव खन्ना और बीआर की वैकेशन बेंच ने राज्य सरकार से कहा कि वह इंसेफेलाइटिस से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता से संबंधित सुविधाओं के बारे में एक हलफनामे में बताए.

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी मुजफ्फरपुर में दिमागी बुखार से पीड़ित 126 बच्चों की मौत पर दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आई है.

सुनवाई के दौरान बेंच को ये भी बताया गया कि इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में इस तरह की मौतें हो चुकी हैं. इसके मद्देनजर बेंच ने राज्य सरकार को मामले पर अपना जवाब रखने के लिए कहा है.

मनोहर प्रताप और संप्रीत सिंह अजमानी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि सरकार चमकी बुखार से निपटने में पूरी तरह नाकामयाब साबित हुई है.

याचिका में कहा गया कि डॉक्टर, अस्पताल में बेड, आईसीयू और चिकित्सकों की कमी की वजह से बिहार के मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के इलाकों में दिमागी बुखार से 126 मौतें हुईं. बीमारी का इलाज तो मौजूद है मगर मेडिकल सुविधाओं की कमी की वजह से मौतें हो रही हैं.

याचिका में उन मीडिया रिपोर्ट की भी बात की गई है जिसमें एसके मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक ने मेडिकल सुविधाओं की अत्यधिक कमी के चलते खुद को इलाज न कर पाने में असमर्थ बताया था.

बेंच के अधिवक्ताओं ने केंद्र और बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि वह तत्काल डॉक्टरों के साथ 500 आईसीयू की व्यवस्था करवाए ताकि इस उभरती हुई स्थिति से निपटा जा सके.

इसके अलावा याचिका में पीड़ित परिवारों को दस लाख रुपये तक का मुआवजा देने की बात कही गई है.


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