निर्भया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी पर रोक की याचिका खारिज की


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सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर, 2012 में हुए निर्भया बलात्कार और हत्याकांड में दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखने के शीर्ष अदालत के 2017 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है. चार में एक मुजरिम अक्षय कुमार सिंह ने यह याचिका दायर की थी. पीड़िता के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई है.

इससे पहले सीजेआई ने सुनवाई से 17 दिसंबर को खुद को अलग कर लिया और याचिका पर विचार के लिए नई पीठ का गठन किया गया था.

कोर्ट ने कहा कि पुनर्विचार याचिका किसी अपील पर बार-बार सुनवाई के लिए नहीं है.  कोर्ट ने कहा ने कहा कि हमें 2017 में दिए मौत की सजा के फैसले पर पुनर्विचार का कोई आधार नहीं मिला.

मुजरिम के वकील ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा.

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय से कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने के लिए एक सप्ताह का समय काफी है.

न्यायालय ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने के लिए समय सीमा तय करने के बारे में टिप्पणी करने से परहेज किया. कोर्ट ने कहा कि दोषी दया याचिका दायर करने के लिए कानून के तहत निर्धारित समय ले सकता है.

सुनवाई से सीजेआई के अलग होने के बाद, शीर्ष अदालत ने 17 दिसंबर की शाम जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ गठित की.

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की विशेष पीठ ने दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई शुरू होते ही उनके वकील एपी सिंह से कहा कि आधे घंटे के भीतर वह अपनी दलीलें पूरी करें.

कुछ मिनट दलीलें सुनने के बाद प्रधान न्यायाधीश बोबडे को इस तथ्य का पता चला कि उनके एक रिश्तेदार इस मामले में पीड़ित की मां की ओर से पहले पेश हो चुके हैं और ऐसी स्थिति में उचित होगा कि कोई अन्य पीठ पुनर्विचार याचिका पर 18 दिसंबर की सुबह साढ़े दस बजे विचार करे.

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ”इन मामलों को 18 दिसंबर को दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए जिसके सदस्य प्रधान न्यायाधीश नहीं हों.”

अक्षय के वकील ए पी सिंह ने बहस शुरू करते हुए कहा कि यह मामला राजनीति और मीडिया के दबाव से प्रभावित रहा है और दोषी के साथ घोर अन्याय हो चुका है.

अक्षय ने दया का अनुरोध करते हुए दलील दी है कि वैसे भी दिल्ली में बढ़ते वायु और जल प्रदूषण की वजह से जीवन छोटा होता जा रहा है.

शीर्ष अदालत ने पिछले साल नौ जुलाई को इस मामले के तीन दोषियों मुकेश, पवन गुप्ता और विनय शर्मा की पुनर्विचार याचिकायें यह कहते हुए खारिज कर दी थीं कि इनमें 2017 के फैसले पर पुनर्विचार का कोई आधार नहीं है.

मामले के छह आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी जबकि एक अन्य आरोपी नाबालिग था, जिसे किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी. इस आरोपी को सुधार गृह में तीन साल गुजारने के बाद रिहा कर दिया गया था.


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