रेपो रेट में 0.35 फीसदी की कटौती, GDP वृद्धि दर का अनुमान भी घटा
भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.35 फीसदी घटाकर 5.40 फीसदी कर दिया है. रिजर्व बैंक ने ये फैसला अपनी मौद्रिक समीक्षा बैठक के दौरान लिया.
इसके अलावा रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिये सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर अनुमान 7 फसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दिया है.
आरबीआई ने कहा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही में 3.1 फीसदी तथा दूसरी छमाही में 3.5 से 3.7 फीसदी के दायरे में रहने का अनुमान है.
आरबीआई ने मौद्रिक नीति के लिए नरम रुख बरकरार रखा. उसने कहा कि महंगाई दर लक्ष्य के दायरे में रहेगी.
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रेपो दर में 0.35 फीसदी की कटौती संतुलित है, 0.25 फीसदी की कटौती अपर्याप्त रहती.
शक्तिकांत दास ने कहा है कि कर्ज पर ब्याज दर को उच्चस्तर पर बनाये रखने को लेकर बैंकों के बीच कोई साठगांठ नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बैंकों से ब्याज दर में और कटौती की अपेक्षा है.
रिजर्व बैंक की ओर से कहा गया है कि उसे भरोसा है कि ऋण मांग बढ़ रही है और आर्थिक वृद्धि भी रफ्तार पकड़ रही है. साथ ही शक्तिकांत दास ने कहा कि रिजर्व बैंक को उम्मीद है कि सरकार आर्थिक वृद्धि में सुधार लाने के लिये और कदम उठाएगी.
उन्होंने कहा कि वास्तविक ब्याज दर पर गौर करने का सही समय नहीं है, हमारा जोर उत्पादन अंतर को पूरा करने पर है.
अर्थव्यवस्था में लगातार नरमी के रुख पर विचार व्यक्त करते हुए आरबीआई ने कहा कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा नरमी चक्रीय है, संरचनात्मक नहीं है. उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक सभी जरूरतंद क्षेत्रों को पर्याप्त नकदी उपलब्धता का अश्वासन देता है.
मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक एक, तीन और चार अक्टूबर 2019 को होगी.