मोदी सरकार नौकरी छीन कर आरक्षण दे रही है: शिव सेना


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केन्द्र और महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा है,‘‘जब सत्ता में बैठे लोग रोजगार और गरीबी दोनों मोर्चों पर विफल होते हैं तब वे आरक्षण का कार्ड खेलते हैं.’’

पार्टी ने साथ ही चेतावनी दी कि अगर यह एक चुनावी चाल है तो यह महंगा साबित होगा. 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद रोजगार का क्या होगा? नौकरी कहां से मिलेगी?’’

शिवसेना ने कहा कि मराठा समुदाय को भी महाराष्ट्र में आरक्षण दिया गया है, लेकिन सवाल अभी भी यही बना हुआ है कि नौकरियां कहां है?

‘सामना’ में कहा गया है कि, ‘‘देश में रोजगार की दर को संतुलित बनाए रखने के लिए हर साल 80 से 90 लाख नए रोजगारों की जरूरत है. लेकिन यह गणित कुछ समय से असंतुलित है. पिछले दो सालों में नौकरी के अवसर बढ़ने के बजाय कम हुए हैं. नोटबंदी और जीएसटी लागू किए जाने के कारण करीब 1.5 करोड़ से लेकर दो करोड़ नौकरियां गई हैं. युवाओं में लाचारी की भावना है.’’

इसमें चुटकी लेते हुए कहा गया है,‘‘सरकार के 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद क्या योग्य युवा कुछ हासिल कर पाएंगे? युवाओं को पकौड़ा तलने की सलाह देने वाले प्रधानमंत्री को आखिरकार आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देना पड़ा.’’

संसद ने सवर्ण आर्थिक आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है.


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