दुनिया में परमाणु हथियारों की संख्या घटी, लेकिन परमाणु संघर्ष का खतरा बढ़ा


SIPRI report says the risk of nuclear conflict up

 

स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति शोध संस्थान (एसआईपीआरआई) ने कहा है कि बीते बारह महीनों में वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों की संख्या में तो कमी आई है, लेकिन परमाणु संघर्ष के खतरे में वृद्धि हुई है.

संस्थान में वरिष्ठ फेलो हंस एम क्रिस्टेनसेन कहते हैं, “ये हथियारों की एक नई तरह की दौड़ है, ये उनकी संख्या को लेकर नहीं है बल्कि उनकी तकनीकी के बारे में है.”

यूरो न्यूज एसआईपीआरआई की रिपोर्ट के हवाले से लिखता है कि पूरी दुनिया में नौ देशों के पास जनवरी की शुरुआत में कुल 13,865 परमाणु हथियार मौजूद थे. जबकि एक साल पहले तक इनकी संख्या 14,465 थी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने की होड़ का स्थान उनकी गुणवत्ता और आधुनिकता ने ले ली है. अब परमाणु संपन्न देश अपने हथियारों को आधुनिक बनाने के लिए प्रयासरत हैं.

क्रिस्टेंसेन कहते हैं, “अब हम परमाणु हथियार संचय की पारंपरिक रणनीति के दौर में नहीं हैं. अब एक सामरिक युद्ध की शुरुआत हो चुकी है.” वे कहते हैं कि परमाणु संपन्न देश अब तकनीकी को बेहतर करने की जुगत में हैं.

वे इसका उदाहरण देते हुए कहते हैं कि अब रूस अमेरिका की एंटी-मिसाइल तकनीकी को धोखा देने वाली मिसाइल बनाने के प्रयास में है. वहीं अमेरिका रूस का मुकाबला करने के लिए कम दूरी पर मार करने वाले परमाणु हथियार विकसित करने में लगा हुआ है.

क्रिस्टेंसेन ने इसकी तुलना शीत युद्ध से करते हुए कहा कि इस तरह की होड़ हम पहले भी देख चुके हैं. हालांकि उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि ये पहले की तरह खतरनाक नहीं है.

अमेरिका मध्यपूर्व के लिए हुई परमाणु अप्रसार संधि से बाहर आ चुका है. और ट्रंप की अनुशंसा पर परमाणु हथियारों के नवीनीकरण की योजना बना रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता तनाव भी ऐसे किसी संघर्ष के लिए कारण बन सकता है.

रिपोर्ट कहती है कि हथियारों की कमी की एक वजह अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट के नाम से हुई परमाणु हथियारों को घटाने की संधि भी है. 2010 में हुई ये संधि 2011 से लागू हो चुकी है.

इसके मुताबिक दोनों बड़ी वैश्विक शक्तियों को परमाणु हथियारों की संख्या सीमित करनी है. इस समय दोनों देशों के पास पूरी दुनिया के 90 फीसदी परमाणु हथियार मौजूद हैं.

इस संधि के मुताबिक 800 अंतर-महाद्वीपीय मिसाइलें, 1,550 वारहेड्स और 700 अन्य मिसाइलें और बमवर्षक रखने की इजाजत है. दोनों देश इस संधि का पालन करने का दावा करते हैं. दोनों की ओर से कहा जा चुका है कि फरवरी 2018 की अंतिम तिथि से पहले ही वे अपने हथियारों की संख्या घटा चुके हैं.

हालांकि कि पाकिस्तान और चीन को लेकर रिपोर्ट कुछ और कहती है. इसके मुताबिक ये दोनों देश अपने परमाणु हथियारों की क्षमता में बढ़ोतरी कर रहे हैं. इससे अगले दशक तक इनके हथियारों की संख्या में इजाफा होगा.


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