सुप्रीम कोर्ट में एम नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ याचिका पर सुनवाई होगी


supreme court agreed to hear  a plea by an NGO challenging cbi interim director nageswara rao

 

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के अंतरिम डायरेक्टर एम नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ एनजीओ ‘कॉमन कॉज’ की याचिका मंजूर कर ली है. इस पर अगले सप्ताह सुनवाई हो सकती है.

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एन एल राव और जस्टिस एस के कौल की पीठ करेगी.

याचिका में एम नागेश्वर राव की नियुक्ति को दिल्ली स्पेशल पुलिस स्टैबलिसमेंट एक्ट 1946 की धारा 4ए के तहत चुनौती दी गई है.

साथ ही यह आरोप लगाया गया है कि नागेश्वर राव की नियुक्ति उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति की सिफारिश के आधार पर नहीं की गई है.

याचिका के मुताबिक शीर्ष अदालत ने नागेश्वर को अंतरिम डायरेक्टर नियुक्त करने के सरकार के 23 दिसंबर के फैसले को आठ जनवरी को निरस्त कर दिया था. लेकिन सरकार ने मनमाने, गैरकानूनी, दुर्भावनापूर्ण तरीके से कदम उठाते हुए और डीएसपीई कानून का ‘पूरा उल्लंघन’ करते हुए फिर से बहाल कर दिया.

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से सरकार को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि सीबीआई डायरेक्टर पद के लिए चयन से जुड़ा सारा रिकार्ड सुरक्षित रखा जाए.

सीबीआई के निदेशक पद से आलोक वर्मा को हटाए जाने के एक दिन बाद 11 जनवरी को अतिरिक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को दोबारा सीबीआई के अंतरिम निदेशक का कार्यभार दे दिया गया था. एम नागेश्वर राव ने आलोक वर्मा के सभी आदेशों को निरस्त करते हुए आठ जनवरी से पहले तक वाली स्थिति बहाल कर दी थी.

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित उच्चधिकार समिति ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से आलोक वर्मा को दोबारा बहाल करने के 48 घंटे के भीतर उन्हें पद से हटा दिया था. इस समिति में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के रूप में न्यायमूर्ति एके सीकरी भी थे.

इसके बाद तबादले के कई आदेश जारी किए गए थे. इनमें ज्वाइंट डायरेक्टर स्तर के छह अधिकारी, सीबीआई के मुख्य प्रवक्ता के साथ-साथ डिप्युटी डायरेक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर स्तर के कई अधिकारी शामिल थे.


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