अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में जल्द सुनवाई से इंकार


sunni waqf board accept land given for construction of mosque

 

सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि विवाद मामले में याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई से इंकार कर दिया है.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने कहा कि पहले ही अपीलों को जनवरी में उचित पीठ के पास सूचीबद्ध कर दिया है.

अखिल भारतीय हिंदू महासभा की ओर से उपस्थित अधिवक्ता बरूण कुमार के मामले पर शीघ्र सुनवाई करने के अनुरोध को खारिज करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘हमने आदेश पहले ही दे दिया है. अपील पर जनवरी में सुनवाई होगी. अनुमति ठुकराई जाती है.’’

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले राम जन्मभूमि भूमि विवाद मामले को जनवरी के पहले हफ्ते में उचित पीठ के पास सूचीबद्ध किया था. वह पीठ मामले पर सुनवाई की तारीख के बारे में फैसला करेगी.

उत्तर प्रदेश सरकार और रामलला की ओर से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन ने लंबे समय से मामले के लंबित रहने का हवाला देते हुए अपीलों की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया था.

इससे पहले 2:1 के बहुमत से तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 1994 के एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई उस टिप्पणी पर पुनर्विचार करने से इंकार कर दिया था जिसमें कहा गया था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. यह मुद्दा अयोध्या भूमि विवाद मामले पर सुनवाई के दौरान उठा था.

तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने तब कहा था कि दीवानी वाद पर साक्ष्यों के आधार पर फैसला किया जाएगा.

पीठ ने यह भी कहा था कि इस मामले में पिछले फैसले की कोई प्रासंगिकता नहीं है.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अभी कुल 14 अपील दायर हैं. उच्च न्यायालय ने चार दीवानी मुकदमों पर अपने फैसले में 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था.


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