टाटा मोटर्स पर मंदी की मार के चलते 30 स्टील कंपनियां बंद होने की कगार पर


due to auto sector slow down 30 steel companies down shutters in Jamshedpur

 

ऑटोमोबाइल क्षेत्र पर मंदी की मार के बीच जमशेदपुर और आदित्यपुर उद्योगिक क्षेत्र (एआईए) में स्थित उद्योगों को टाटा मोटर्स में सिलसिलेवार ब्लॉक क्लोजर के कारण खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक इलाके में स्टील सेक्टर की करीबन 30 कंपनियां बंद होने की कगार पर हैं और 12 कंपनियों ने एक अगस्त को उत्पादन कार्य रोक दिया.

पिछले एक महीने में यह चौथी बार है जब टाटा मोटर्स ने ब्लॉक क्लोजर है. कंपनी ने एक अगस्त से 3 अगस्त तक ब्लॉक क्लोजर का फैसला किया है. कंपनी ने स्थायी कर्मचारियों से 5 अगस्त और करीबन हजार से अधिक अस्थायी कर्मचारियों से 12 अगस्त तक काम पर लौटने को कहा है.

बाजार में मांग में कमी के चलते टाटा मोटर्स को लगातार ब्लॉक क्लोजर की घोषणा करनी पड़ी है. पिछले दो महीनों में हर महीने केवल 15 दिन ही उत्पादन कार्य हुआ है. यूनियन के सूत्रों ने बताया कि अगस्त के महीने में केवल एक हफ्ते ही उत्पादन का काम होगा. यही वजह है कि एआईए में टाटा मोटर्स की करीबन 1000 के अधिक ऑटो सहायकों के पास काम सीमित हो गया है.

बिजली टैरिफ में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी से बिजली की भट्ठी वाले स्टील क्षेत्र काफी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. बिजली इस क्षेत्र में एक अहम कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल की जाती है. इसका प्रभाव ये रहा कि अब तक करीबन 30 कंपनियां ने काम बंद कर दिया.

इस स्थिति पर आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के मालिक इंद्र अग्रवाल ने कहा, “ऑटो क्षेत्र में मंदी कोई नई बात नहीं है…. ये हर दो से तीन साल में आती है. मैं आज ही टाटा मोटर्स के प्लांट हेड से मिला. उन्होंने कहा है कि कंपनी को एक बार फिर 3-4 दिनों के लिए ब्लॉक क्लोजर करना होगा, जिसके बाद स्थितियां सामान्य हो जाएंगी. हमें उम्मीद है कि सितंबर में सब सामान्य हो जाएगा. पिछले साल की तुलना में इस साल जुलाई में कंपनी को 40 फीसदी कम ऑर्डर मिले हैं. हमारी कुछ कंपनियां सीमित स्तर पर काम कर रही हैं, वहीं कुछ कंपनियों में मैंटेनेंस का काम जारी है.”

उन्होंने कहा कि अप्रैल में बिजली पर टैरिफ में 38 फीसदी की बढ़ोत्तरी के बाद स्टील क्षेत्र की कम से कम 25-30 कंपनियों ने काम बंद कर दिया है.

बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी इलाके में कंपनियों के बंद होने के पीछे एक बड़ा कारण रहा. दामोदर वैली कारपोरेशन (डीवीसी) और जमशेदपुर यूटिलिटी एंड सर्विस कंपनी (जुस्को) की तुलना में जेबीवीएनएल अधिक उंचे दरों पर बिजली सप्लाई करती है.

अग्रवाल ने बताया कि डीवीसी गिरिडीह, रामगढ़, पतरातू, देवघर और रांची में बिजली सप्लाई करती है. जिसकी वजह से इन क्षेत्रों में कंपनियां कम लागत में उत्पादन कर रही हैं. जबकि आदित्यपुर और जमशेदपुर में जेबीवीएनएल 5.50 रुपये प्रति यूनिट शुल्क वसूलती है. डीवीसी में 2.95 रुपये प्रति यूनिट और जुस्को 3.50 रुपये प्रति यूनिट दाम है.

उन्होंने मांग की कि सरकार को क्षेत्र में तेजी लाने के लिए बढ़े हुए दाम तुरंत वापस लेने चाहिए और 15 साल पुरानी गाड़ियों को तुरंत बंद कर देना चाहिए.

लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष रुपेश कटियार ने बताया कि मंदी से जमशेदपुर, आदित्यपुर और धालभूमगढ़ की करीबन 1000 कंपनियां प्रभावित हुई हैं. जिसकी वजह से 30,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कामगारों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है.


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