आरबीआई के छह अप्रैल 2018 के परिपत्र के अनुसार केंद्रीय बैंक द्वारा विनियमित संस्थाओं पर आभासी मुद्राओं से संबंधित कोई भी सेवा प्रदान करने पर रोक है.
दिल्ली के 45 वर्षीय मरीज के संपर्क में छह लोग आए हैं. इसमें मरीज के परिवार के सदस्य भी शामिल हैं.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने 18 फरवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया था.
इसी बीच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सोमवार को केंद्र और दिल्ली सरकार की आलोचना की. इनका आरोप है कि केंद्र और दिल्ली सरकार हिंसा प्रभावित लोगों को इलाज और कानूनी सहायता पहुंचाने में विफल रहे.
खारिज पर्ची में किसी व्यक्ति को एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर रखने के कारणों का उल्लेख होगा.